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मुंबई के साकीनाका इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म से कम नहीं, लेकिन ये पूरी तरह हकीकत है। यहां एक पति ने अपनी प्रेमिका के साथ जिंदगी बिताने के लिए अपनी ही पत्नी की हत्या की साजिश रची, सुपारी दी, हत्या को अपनी आंखों के सामने अंजाम दिलवाया और फिर पूरे मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की।
चौंकाने वाली बात ये रही कि शुरुआती जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या मान लिया था और केस लगभग बंद होने वाला था। लेकिन मृतका के पिता के शक ने पूरी कहानी पलट दी और करीब डेढ़ साल बाद इस खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ।
मार्च 2026 में साकीनाका पुलिस ने इस मामले में पति समेत कुल 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सकाराम चौधरी (पति), शंकर डांगी, बाबू उर्फ राघव उर्फ अमरचंद गायरी और दिनेश गायरी के रूप में हुई है।
कैसे सामने आया मामला
पुलिस के मुताबिक, 14 अक्टूबर 2024 को साकीनाका के संघर्ष नगर में रहने वाली 34 वर्षीय नारंगी उर्फ गीता चौधरी का शव घर के किचन में पंखे से लटका मिला था। मौके की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इसे आत्महत्या मानते हुए आकस्मिक मृत्यु (ADR) का मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। मुंबई में हुए पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए राजस्थान ले जाया गया, जहां परिवार ने उसे दफना दिया।
लेकिन मृतका के पिता भानाराम चौधरी को अपनी बेटी की मौत पर शक था। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है। उनकी शिकायत पर राजस्थान में हत्या का मामला दर्ज हुआ, जिससे केस ने नई दिशा पकड़ी।
कब्र से निकला सच
पिता के लगातार प्रयासों के बाद शव को कब्र से निकालकर राजस्थान में दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। इस बार रिपोर्ट में साफ हुआ कि नारंगी की मौत रस्सी से गला दबाने के कारण हुई थी, यानी यह हत्या थी।
इसके बाद राजस्थान पुलिस ने जीरो FIR दर्ज कर केस साकीनाका पुलिस को ट्रांसफर कर दिया।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
मृतका के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले को CBI को सौंपने की मांग की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साकीनाका पुलिस को मेडिकल एक्सपर्ट की टीम बनाने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि यह टीम तय करे कि मामला हत्या का है या आत्महत्या। मुंबई पुलिस की बनाई मेडिकल टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में इसे हत्या ही बताया।
खुलने लगी साजिश की परतें
इसके बाद साल 2025 में ADR को FIR में बदला गया और साकीनाका पुलिस ने विशेष टीम बनाकर जांच तेज कर दी। जांच के दौरान मुंबई पुलिस के DCP दत्ता नलावड़े ने खुलासा किया कि आरोपी पति पहले भी दो बार अपनी पत्नी की हत्या की कोशिश कर चुका था।
एक बार ट्रेन से फेंकने की कोशिश की दूसरी बार चाकू से हमला किया। लेकिन दोनों बार वह नाकाम रहा। तीसरी बार साजिश परफेक्ट रची गई। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पति सकाराम ने अपने दोस्त शंकर डांगी को 6.70 लाख रुपये में पत्नी की हत्या की सुपारी दी। शंकर ने बाबू गायरी और दिनेश गायरी को इसमें शामिल किया। 14 अक्टूबर 2024 को तीनों आरोपी घर पहुंचे।
सकाराम ने अपनी पत्नी के पैर पकड़े
जबकि बाकी दो आरोपियों ने रस्सी से गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद सबूत छिपाने के लिए शव को पंखे से लटका दिया गया, ताकि मामला आत्महत्या लगे और पुलिस गुमराह हो जाए।
पुलिस भी हुई थी गुमराह
शुरुआती जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला, जिसकी वजह से मामला लगभग बंद होने वाला था। अगर दोबारा पोस्टमार्टम नहीं होता और पिता हाईकोर्ट नहीं जाते, तो यह केस हमेशा के लिए आत्महत्या मान लिया जाता।
ऐसे टूटा आरोपी
तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी और उसके परिवार से पूछताछ की।सकाराम तीन बार पूछताछ में साजिश छिपाने में कामयाब रहा, लेकिन चौथी बार सख्ती से पूछताछ में वह टूट गया और पूरी साजिश कबूल कर ली। जांच में सामने आया कि उसका एक अन्य महिला से प्रेम संबंध था और वह उसके साथ रहना चाहता था। पत्नी इस रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा थी, इसलिए उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।
इस पूरे मामले में अगर मृतका के पिता को शक नहीं होता, वे दोबारा पोस्टमार्टम की मांग नहीं करते और हाईकोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाते, तो यह हत्या हमेशा के लिए आत्महत्या के तौर पर दर्ज रह जाती।
गणेश सोलंकी की रिपोर्ट



