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अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो मार्च का महीना बेस्ट है। बसंत का मौसम सुहावना होता है, न बहुत ठंडा और न बहुत गर्म होता है। इस मौसम में पहाड़ों पर भीड़ भी कम ही होती है। अगर आपको बर्फीली पहाड़ियां रोमांचित करती हैं तो मार्च आपके लिए बेस्ट है। इन दिनों पहाड़ों पर बर्फ की मोटी चादर जमी होती है। कई जगहों पर तो मार्च में स्नो फॉल भी देखने को मिल जाता है। अगर आप गर्मी शुरू होने से पहले एक बार फिर बर्फ देखना चाहते हैं तो हम आपको कुछ ऐसी जगहों के बारे में बता रहे हैं जहां मार्च में भी बर्फबारी होती है। ये हिमालय के ऊंचे इलाके हैं जहां मार्च में भी सर्द मौसम रहता है। कई जगहों पर ढलानों, पहाड़ी दर्रों, घास के मैदानों और यहां तक कि गांवों की छतों पर भी बर्फ जमी रहती है। आइये जानते हैं मार्च में कहां बर्फ पड़ती है?
मार्च में कहां बर्फ पड़ती है?
गुलमर्ग- जम्मू और कश्मीर के बारामूला जिले में करीब 2,650 मीटर की ऊंचाई पर गुलमर्ग है, जहां आपको मार्च के महीने में भी बर्फीले पहाड़ देखने को मिलेंगे। दिसंबर से मार्च के बीच यहां बर्फबारी होती रहती है। गुलमर्ग गोंडोला, जो दुनिया की सबसे ऊंची केबल कारों में से एक है, पर्यटकों को लगभग 3,980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अफरवत शिखर तक ले जाती है। इस ऊंचाई पर मार्च और कभी-कभी अप्रैल तक भी बर्फ मोटी बनी रहती है।
मनाली- मनाली कुल्लू घाटी में लगभग 2,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मार्च में मनाली शहर में बर्फ पिघलने लगती है, खासकर महीने के अंत में। हालांकि आसपास के ऊंचे इलाकों में बर्फ की चादर बनी रहती है। मनाली से लगभग 13 किमी दूर सोलांग घाटी में आमतौर पर मार्च की शुरुआत में बर्फ रहती है। यह स्कीइंग, स्नो ट्यूबिंग और स्नोमोबिलिंग जैसी बर्फ से जुड़ी एक्टिविटी करने के लिए बेस्ट प्लेस है।
औली- उत्तराखंड के चमोली जिले में 2,800 से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली, भारत के सबसे प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट में से एक है। यहां दिसंबर से लेकर फरवरी तक बर्फबारी होती रहती है। मार्च के महीने में आपको यहां बर्फीली पहाड़ियां देखने को मिल जाएंगी। औली में काफी स्नो एक्टिविटीज होती हैं। मार्च में आपको यहां ताजा स्नोफॉल भी देखने को मिल सकता है।
स्पीति घाटी- हिमाचल प्रदेश में स्थित स्पीति घाटी लगभग 3,800 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है, जो इसे भारत के सबसे ऊंचे बसे हुए क्षेत्रों में से एक बनाती है। मार्च में भी यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। तापमान माइनस में बना रहता है। खासतौर से रात में काज़ा, किब्बर, लांग्ज़ा और हिक्किम जैसे गांव बर्फ की चादर से ढके रहते हैं। यहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है। मार्च के महीने में बर्फबारी के कारण रोहतांग दर्रा और कुंजुम दर्रा होते हुए मनाली-काजा मार्ग बंद रहता है।
युमथांग घाटी- उत्तरी सिक्किम में स्थित युमथांग घाटी करीब 3,564 मीटर की ऊंचाई पर है। वसंत ऋतु में इसे फूलों की घाटी कहते हैं। अप्रैल में रोडोडेंड्रोन के खिलने से पहले मार्च की शुरुआत में भी यह घाटी बर्फ से ढकी रहती है। यह घाटी लाचुंग से आगे है और भारतीय यात्रियों के लिए यहां जाने के लिए परमिट की आवश्यकता होती है। आमतौर पर मार्च में अधिक और स्थिर बर्फ की चादर बिछी रहती है।



