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सामने से जा रही थी ससुर की लाश, बेटी ने रोते-रोते कैमरा किया ON…फिर बनाई बेशर्मी वाली रील!

एक महिला का वीडियो इन दिनों लोगों के बीच तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखने के बाद हर कोई नाराज हो रहा है और यही कह रहा है कि लाइक्स और व्यूज के लिए लोग कितना ज्यादा गिर सकते है. ये क्लिप उसी का सबूत है. वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टा पर शेयर किया गया है.

सामने से जा रही थी ससुर की लाश, बेटी ने रोते-रोते कैमरा किया ON…फिर बनाई बेशर्मी वाली रील!

सोशल मीडिया पर हाल ही में एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान करने के साथ-साथ गुस्से से भी भर दिया है. इस वीडियो में एक महिला अपने ससुर की अंतिम यात्रा के दौरान रील बनाते हुए दिखाई दे रही है. एक तरफ वह अपने ससुर के निधन का शोक मना रही है, रो रही है, और दूसरी तरफ मोबाइल कैमरे में पूरा दृश्य रिकॉर्ड कर रही है.

इस वायरल वीडियो की जगह और समय की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है, लेकिन जो दृश्य सामने आए हैं, वे काफी संवेदनशील हैं. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ससुर की अर्थी उठाई जा रही है, आसपास मोहल्ले के लोग मौजूद हैं और माहौल गमगीन है. इसी बीच बेटी पहले तो रोती हुई नजर आती है, लेकिन कुछ ही पलों में वह अपना फोन निकालती है और वीडियो रिकॉर्ड करने लगती है. इतना ही नहीं, उसने आसपास खड़ी महिलाओं को भी अपने रील में शामिल किया और पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया के लिए कैद किया.

वीडियो देख गुस्सा हुए लोग

बताया जा रहा है कि इस वीडियो को बाद में महिला ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया. वीडियो सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं काफी तीखी रहीं. कई यूजर्स ने इसे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया, तो कुछ ने इसे लाइक्स और व्यूज की भूख का नतीजा कहा. लोगों का कहना है कि निजी और दुखद पलों को भी अब कंटेंट में बदल दिया गया है, जो समाज के लिए चिंताजनक संकेत है.

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि अंतिम संस्कार जैसे गंभीर मौके पर वीडियो बनाना और उसे सार्वजनिक मंच पर डालना बेहद असंवेदनशील व्यवहार है. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या आज के दौर में भावनाएं भी दिखावे तक सीमित रह गई हैं. उनका मानना है कि शोक और दुख जैसे निजी अनुभवों को कैमरे के सामने लाना न सिर्फ परिवार की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि समाज में गलत उदाहरण भी पेश करता है.

वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति अपने दुख को अलग तरीके से व्यक्त करता है और हमें बिना पूरी जानकारी के किसी के इरादों पर फैसला नहीं सुनाना चाहिए. हालांकि, ऐसी राय रखने वालों की संख्या कम नजर आई. ज्यादातर लोगों का मानना था कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता ने इंसान को इतना आत्मकेंद्रित बना दिया है कि वह सही और गलत के बीच फर्क करना भूलता जा रहा है.

यह वीडियो एक बार फिर इस बहस को हवा देता है कि सोशल मीडिया की सीमाएं क्या होनी चाहिए. क्या हर पल को रिकॉर्ड करना और साझा करना जरूरी है. खासकर तब, जब वह पल किसी की जिंदगी का सबसे दुखद समय हो. विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए. भावनात्मक क्षणों में कैमरा उठाने से पहले यह समझना जरूरी है कि इसका असर खुद पर, परिवार पर और समाज पर क्या पड़ेगा.

hi.quicksamachar@gmail.com

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