जौनपुर में 25 हजार के इनामी थानेदार का कोर्ट में सरेंडर, मुंह पर गमछा बांधकर पहुंचा; वसूली का था आरोप​

जौनपुर में 25 हजार के इनामी थानेदार का कोर्ट में सरेंडर, मुंह पर गमछा बांधकर पहुंचा; वसूली का था आरोप​

Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 25 हजार रुपये के इनामी और फरार चल रहे सुरेरी के पूर्व थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह ने सोमवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया. मुंह पर गमछा लपेटकर कोर्ट पहुंचने के कारण उनके सरेंडर की तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं. आत्मसमर्पण के बाद एसीजेएम की अदालत ने आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया.

दिव्य प्रकाश सिंह पर जौनपुर और वाराणसी के दो युवकों को कथित तौर पर अवैध तरीके से हिरासत में लेने, थाने में प्रताड़ित करने और उनके खातों से अलगअलग बैंक खातों में लाखों रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने के गंभीर आरोप हैं. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें सफेद कार से उठाकर सुरेरी थाने लाया गया और थाने के किचन रूम में बंद कर कथित तौर पर मारपीट की गई. पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जेल भेजने की धमकी दी गई और हाथ में तमंचा देकर वीडियो बनाए गए.

मामले की शिकायत वाराणसी के डीआईजी वैभव कृष्ण से की गई थी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। शिकायतों के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए डीआईजी के निर्देश पर जांच कराई गई. दोनों मामलों को लेकर पांच सदस्यीय एसआईटी गठित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है. इसके बाद जलालपुर और सुरेरी थानों में संबंधित धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए.

सिपाही की मौत के बाद हुए थे फरार

बताया जा रहा है कि इसी मामले की जांच और कार्रवाई के दौरान सुरेरी थाने में तैनात वर्ष 2025 बैच के आरक्षी अभिषेक सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. इसके बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष दिव्य प्रकाश सिंह फरार हो गए. पुलिस की ओर से उनसे संपर्क करने का प्रयास किए जाने की बात कही गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका. इसके बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई. फरार चल रहे दिव्य प्रकाश सिंह और एक अन्य आरोपी पर 24 सितंबर को 2525 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था. पुलिस उनकी तलाश कर रही थी. इसी बीच सोमवार को उन्होंने जौनपुर न्यायालय में पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया.

सरेंडर के तरीके पर उठे सवाल

दिव्य प्रकाश सिंह के मुंह पर गमछा लपेटकर न्यायालय पहुंचने की तस्वीरें सामने आने के बाद उनके सरेंडर के तरीके को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि सामान्य मामलों में फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अभियान चलाती है, जबकि इस मामले में आरोपी ने अदालत में सीधे आत्मसमर्पण किया. हालांकि, पुलिस की ओर से सरेंडर की प्रक्रिया को लेकर किसी तरह की अनियमितता की पुष्टि नहीं की गई है. मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सामने आएगी.

अधिवक्ता ने आरोपों को बताया गलत

दिव्य प्रकाश सिंह के अधिवक्ता शुभम सिंह ने कहा कि उनके मुवक्किल को जलालपुर थाने में दर्ज मुकदमे में पुलिस ने फर्जी तरीके से फंसाया है. उन्होंने बताया कि दिव्य प्रकाश सिंह सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन सीजेएम के अवकाश पर होने के कारण एसीजेएम की अदालत में आत्मसमर्पण किया गया. अदालत ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल भेज दिया. अब पुलिस जांच और न्यायालयीन कार्रवाई के दौरान पीड़ितों के आरोप, बैंक खातों में हुए कथित लेनदेन, हिरासत और प्रताड़ना से जुड़े आरोपों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है.

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