Unique Biometric Case: एक जैसी शक्ल तो जुड़वां बहनों में देखी होगी, लेकिन यहां रेटिना और फिंगरप्रिंट भी निकले सेम, बनते-बनते अटक गया आधार, पढ़ें ये अनोखी कहानी

Unique Biometric Case: एक जैसी शक्ल तो जुड़वां बहनों में देखी होगी, लेकिन यहां रेटिना और फिंगरप्रिंट भी निकले सेम, बनते-बनते अटक गया आधार, पढ़ें ये अनोखी कहानी
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सोचिए, दो जुड़वां बहनें हों और उनकी शक्ल-सूरत एक जैसी हो, तो उन्हें पहचानना परिवार खात तौर पर मां तक के लिए भी कई बार मुश्किल हो जाता है. लेकिन रामपुर में मामला इससे कहीं आगे निकल गया. यहां सेंट मैरी स्कूल की कक्षा 10 में पढ़ने वाली जुड़वां बहनें खिज़रा और तूबा जुबैर ऐसी बायोमेट्रिक समानता की वजह से परेशान हो गईं कि एक का आधार अपडेट होता तो दूसरी का आवेदन डुप्लीकेसी बताकर रद्द हो जाता था. कई महीनों तक चली इस परेशानी का असर उनकी 10वीं बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन पर भी पड़ने लगा.

दरअसल खिज़रा और तूबा के आधार कार्ड पहले से बने हुए थे, लेकिन अब बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के लिए उन्हें आधार अपडेट कराना था. इसी दौरान बायोमेट्रिक प्रक्रिया में अड़चन आ गई. दोनों बहनों के फिंगरप्रिंट और आंखों का रेटिना इतना समान पाया गया कि सिस्टम दूसरे आवेदन को पहले वाले रिकॉर्ड से डुप्लीकेट मानने लगा. परिवार ने कई बार आधार केंद्र जाकर इसे ठीक कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार समस्या वहीं की वहीं रही. एक तरफ 10वीं के रजिस्ट्रेशन की चिंता थी, तो दूसरी तरफ यह समझ नहीं आ रहा था कि आखिर दो अलग-अलग बहनों की पहचान सिस्टम में अलग कैसे दर्ज हो.

मोबाइल के फेस लॉक ने खोल दिया बड़ा राज
इस पूरे मामले में एक दिलचस्प मोड़ तब आया, जब परिवार को मोबाइल के फेस लॉक से दोनों बहनों की असामान्य समानता का अंदाजा हुआ. खिज़रा ने बताया कि उनके पिता ने एक बार उनके चेहरे से फोन लॉक किया और तूबा का चेहरा दिखाने पर फोन अनलॉक हो गया.

इसके बाद तूबा के चेहरे से फोन लॉक किया गया तो खिज़रा का चेहरा दिखाने पर भी फोन खुल गया. इसी घटना के बाद परिवार को लगा कि दोनों बहनों के चेहरे ही नहीं, बल्कि आंखों से जुड़ी पहचान में भी काफी समानता हो सकती है. खिज़रा के मुताबिक, इसी वजह से उन्होंने इतनी परेशानियां झेलीं.

तब आएं डीएम के पास
जब आधार केंद्रों पर लगातार कोशिश के बाद भी समाधान नहीं निकला तो परिवार के लोगों ने जिलाधिकारी से मिलने का फैसला किया. खिज़रा ने बताया कि उनके चाचू ने उनसे कहा कि डीएम साहब के पास चलते हैं, वहीं से कोई रास्ता निकल सकता है. इसके बाद परिवार रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के पास पहुंचा और पूरी समस्या बताई. डीएम ने मामले को गंभीरता से लिया और यूआईडीएआई के दिल्ली और लखनऊ कार्यालयों से संपर्क किया. परिवार को भरोसा दिया गया कि उन्हें कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी और इसी प्रक्रिया के जरिए समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.

ढाई से तीन महीने तक चलती रही प्रक्रिया
खिज़रा की बात की पुष्टि उनके चाचा मकसूद अहमद ने भी की. उन्होंने बताया कि दोनों बच्चियां उनकी भतीजियां हैं और सेंट मैरी स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ती हैं. उनके मुताबिक, एक का आधार अपडेट हो जाता था, जबकि दूसरे का आवेदन रिजेक्ट हो जाता था. मकसूद अहमद के अनुसार, डीएम ने इसे काफी रेयर केस बताया और दिल्ली तथा लखनऊ में संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद वहां से जो निर्देश मिलते रहे, परिवार उसी के मुताबिक प्रक्रिया पूरी करता रहा. इस दौरान डीएम भी बीच-बीच में फोन करके अपडेट लेते रहे. करीब ढाई से तीन महीने तक यह प्रक्रिया चली. आखिरकार दोनों बहनों के पुराने रिकॉर्ड को हटाकर उनके नए आधार कार्ड अलग-अलग अपडेट हो गए. परिवार के मुताबिक, 10वीं के रजिस्ट्रेशन में आ रही परेशानी भी इसी के चलते दूर हो सकी.

ऐसा केस पहली बार सामने आया
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि खिज़रा और तूबा जुबैर, जुबेर इलियास की बेटियां हैं और दोनों 10वीं कक्षा की छात्राएं हैं. बचपन में माता-पिता की पहचान के आधार पर उनके आधार कार्ड बनाए गए थे. अब बोर्ड परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक के आधार पर आधार अपडेट होना था. डीएम के मुताबिक, पहली बच्ची का आधार अपडेट हो गया, लेकिन दूसरी बच्ची के फिंगरप्रिंट और आई रेटिना स्कैन पहले वाली बच्ची से मैच कर गए. इसी वजह से उसका आवेदन डुप्लीकेसी में चला गया और आगे नहीं बढ़ पाया. इसके बाद जिला प्रशासन ने दिल्ली में यूआईडीएआई अधिकारियों से संपर्क किया और वहां से लखनऊ मुख्यालय के अधिकारियों के साथ समन्वय किया गया.

‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ बताया मामला
अजय कुमार द्विवेदी ने इस मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ द रेयर’ बताया. उनके मुताबिक, जुड़वां बच्चों में भी रेटिना या फिंगरप्रिंट में थोड़ा-बहुत अंतर होता है, लेकिन इस मामले में दोनों में कोई अंतर नहीं मिला. डीएम ने कहा कि यूआईडीएआई ने विशेष प्रयास करते हुए दोनों बच्चियों के अलग-अलग आधार कार्ड बनाने की व्यवस्था की. उनके मुताबिक, इससे दोनों छात्राओं की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जरूरतों में मदद मिलेगी.

परिवार ने जताया डीएम का आभार
मकसूद अहमद ने बताया कि परिवार लंबे समय से इस परेशानी से गुजर रहा था. उनके मुताबिक, उन्होंने कभी ऐसा मामला नहीं सुना था जिसमें जुड़वां बहनों के बीच इस तरह रेटिना और फिंगरप्रिंट मैच होने की वजह से आधार की प्रक्रिया अटक गई हो. अब दोनों बहनों के आधार अलग-अलग अपडेट हो चुके हैं. खिज़रा ने भी जिलाधिकारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी वजह से आधार अपडेट हो पाया और अब उनका 10वीं कक्षा का रजिस्ट्रेशन हो सकेगा. परिवार ने भी इस पूरी प्रक्रिया में मदद करने के लिए जिलाधिकारी का आभार जताया है.

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