मथुरा में बीजेपी के चिंतन शिविर के पीछे की असल कहानी क्या है?​

मथुरा में बीजेपी के चिंतन शिविर के पीछे की असल कहानी क्या है?​

दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता कहां जाता है? इस रास्ते का एक बड़ा हिस्सा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है. वही पश्चिमी यूपी… जिसे बीजेपी का मजबूत किला कहा जाता है. 2017 में इसी इलाके की 136 विधानसभा सीटों में बीजेपी ने 109 सीटें जीती थीं, लेकिन 2022 में तस्वीर बदली और बीजेपी का आंकड़ा घटकर 93 सीटों पर आ गया. पश्चिमी यूपी में सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, मेरठ, अलीगढ़ और आगरा मंडल की सीटों को रखा गया है.

यानी पांच साल में 16 सीटों का नुकसान और हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को न तो नुकसान हुआ और न ही फायदा. बल्कि वह अपना स्ट्राइक रेट 70 फीसदी का बरकरार रखे रही. बीजेपी को पता है कि अगर उसने पश्चिमी यूपी में पिछले पांच चुनाव वाला प्रदर्शन बरकरार रखा तो 2027 की लड़ाई आसान हो जाएगी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यही वजह है किबीजेपी ने पश्चिमी यूपी में संगठन की पूरी ताकत झोंक दी है. हाल में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने मेरठसहारनपुर दौरा किया और अब मथुरा में बीजेपीसंघ का बड़ा मंथन 3 और 4 अक्टूबर को होने जा रहा है.

पश्चिमी यूपी क्यों इतना जरूरी?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश को समझे बिना यूपी का चुनावी गणित अधूरा है. यहां 136 विधानसभा सीटें हैं. यानी 403 सदस्यीय विधानसभा का लगभग एकतिहाई हिस्सा. पश्चिमी यूपी में जो पार्टी बड़ी बढ़त बनाती है… वो पूरे प्रदेश के बहुमत के गणित को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है और बीजेपी ने इस गणित को 2017 में सबसे मजबूती से साधा था. 2017 में पश्चिमी यूपी की 136 सीटों में बीजेपी ने 109 सीटें जीतीं यानी स्ट्राइक रेट 80 फीसदी का रहा.

वहीं, समाजवादी पार्टी को 21, बहुजन समाज पार्टी को 3, कांग्रेस को 2 और RLD को सिर्फ 1 सीट मिली थी. ये वो चुनाव था जब पश्चिमी यूपी में बीजेपी का हिंदुत्व, कानूनव्यवस्था, कैराना और मुजफ्फरनगर के बाद बदले सामाजिक समीकरण जैसे मुद्दों के साथ मजबूत चुनावी प्रदर्शन देखने को मिला. 2022 आया और फिर किसान आंदोलन का असर, गन्ना किसानों के सवाल, जाटमुस्लिम सामाजिक समीकरण और सपाआरएलडी गठबंधन.

2022 में पश्चिमी यूपी में बीजेपी को चुनौती मिली और आंकड़ों ने भी बदलाव दिखाया. 136 सीटों वाले पश्चिमी यूपी में बीजेपी 93 सीटों पर सिमट गई, जबकि सपा ने 43 सीटें जीतीं. यानी बीजेपी को 16 सीटों का नुकसान हुआ. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी को पश्चिम यूपी में झटका नहीं लगा. पश्चिमी यूपी की 19 लोकसभा सीट में से 12 सीट जीतने में कामयाब हुई. 2019 में भी बीजेपी 12 सीट ही जीती थी.

BJP को 2027 में असली डर किस बात का?

2027 में सवाल सिर्फ सत्ता बचाने का नहीं है. सवाल ये है कि पश्चिमी यूपी में बीजेपी अपना 2017 वाला आधार कितना वापस ला पाती है. यही वजह है कि बीजेपी ने अब पश्चिमी यूपी को सिर्फ चुनावी दौरे का इलाका नहीं बल्कि ऑर्गनाइजेशनल प्रोजेक्ट बना दिया है. बीजेपी के पश्चिम प्रांत में 71 सीटें हैं. इन सीटों पर 2017 में बीजेपी ने 54 और 2022 में 41 सीटें जीती थीं. इसीलिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने चुनावी सक्रियता की शुरुआत पश्चिमी यूपी से की.

मेरठ और सहारनपुर में करीब 4,800 शक्ति केंद्र संयोजक और मंडल अध्यक्षों के साथ संगठन की समीक्षा, करीब 2 हजार युवाओं से संवाद और बूथ स्तर की तैयारियों पर फोकस रहा. इसके अलावा बीजेपी और संघ, पश्चिमी यूपी में लगातार बैठक कर रहा है. आगरा में संघ की बैठक हो रही है, नोएडा में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीजेपी नेताओं से मिल रहे हैं और अब मथुरा में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित किया जा रहा है. इस बार बीजेपी ने पश्चिमी यूपी में 110 से अधिक सीट जीतने का लक्ष्य रखा है और इसकी रणनीति मथुरा में ही बनेगी.

क्या नया नैरेटिव तैयार हो रहा है?

2017 के चुनाव में बीजेपी ने काशी का नैरेटिव तैयार किया. 2022 में अयोध्या का नैरेटिव था और अब 2027 में मथुरा का नैरेटिव तैयार किया जा रहा है. बीजेपी का नारा भी है ‘अयोध्या तो झांकी है, काशीमथुरा बाकी है’… अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पूरा होने के बाद आगामी विधानसभा चुनाव पहला ऐसा चुनाव होगा, जिसमें राम मंदिर निर्माण का मुद्दा नहीं होगा… लिहाजा अब फोकस अयोध्या से आगे निकलकर मथुरा और पश्चिमी यूपी पर केंद्रित किया जा सकता है.

बीजेपी नेताओं का मानना है कि अयोध्या में चंदा चोरी विवाद के बाद पार्टी अब मथुरा में बैठक कर ये संदेश देना चाहती है कि वैचारिकी रूप से अपने कोर एजेंडा अयोध्या, काशी और मथुरा के प्रति उतनी ही सजग है. यही वजह है कि मथुरा के जरिए वह पूरे यूपी के साथ पश्चिमी यूपी को खास तौर पर साधना चाहती है. अगर बीजेपी पश्चिमी यूपी में कमजोर पड़ती है तो क्या होगा? 136 सीटों के पश्चिमी यूपी ने 2017 में बीजेपी के 14 साल के सत्ता के वनवास को खत्म किया था.

2022 में भी 90 से अधिक सीट जीतकर बीजेपी सत्ता में लौटी थी. ऐसे में उसे पता है कि जीत का आधार पश्चिमी यूपी का प्रदर्शन ही तय करेगा. यही कारण है कि पश्चिमी यूपी में एकएक सीट का संगठनात्मक हिसाब बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण हो गया है. बीजेपी के चिंतन शिविर में कानूनव्यवस्था के साथ हिंदुत्व और ब्रजमथुरा जैसे सांस्कृतिक मुद्दों को कितना और किस रूप में चुनावी नैरेटिव बनाना है… इस पर बात हो सकती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *