
बरेली, अमृत विचार। रविवार तड़के शुरू हुई बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। पांच करोड़ रुपये खर्च कर नालों की सफाई के दावों के बावजूद अटल सेतु, सुभाषनगर पुलिया, स्टेशन रोड और कई प्रमुख मार्ग जलमग्न हो गए। निचले इलाकों में घरों तक पानी पहुंचने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुबह करीब सवा चार बजे शुरू हुई रिमझिम बारिश दोपहर तक जारी रही। इससे मौसम तो सुहावना हो गया और उमस से राहत मिली, लेकिन शहर के कई हिस्सों में जलभराव ने जनजीवन प्रभावित कर दिया। अटल सेतु के नीचे और सुभाषनगर पुलिया पर सड़कें तालाब जैसी नजर आईं। दोपहिया और ईरिक्शा चालकों को पानी से होकर गुजरना पड़ा, जबकि कई स्थानों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। पुराना शहर, जोगीनवादा, सिकलापुर समेत अन्य निचले इलाकों में नाले ओवरफ्लो होने से पानी घरों में घुस गया। जल निकासी का मुकम्मल इंतजाम न होने से बारिश थमने के बाद भी कई घंटों तक प्रमुख मार्गों से निकलना दुश्वार रहा। वहीं, नगर निगम ने इस वर्ष नाला सफाई पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए थे और मानसून से पहले व्यापक सफाई अभियान चलाने का दावा किया था।
कागजों में साफ हुए नाले, सड़कों पर आया सच
नगर निगम हर साल मानसून से पहले नालों की तलीझाड़ सफाई का दावा करता है। इस बार भी शहर के छोटे बड़े नालों को दुरुस्त करने के लिए पांच करोड़ रुपये का भारीभरकम बजट ठिकाने लगा दिया गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अफसरों ने कागजों पर तो नाले साफ दिखा दिए, लेकिन रविवार को हुई चंद घंटों की रिमझिम बारिश ने ही इस सफाई अभियान का सच चौराहे पर ला दिया।
सुभाषनगर पुलिया बनी लोगों के लिए आफत
सुभाषनगर पुलिया के नीचे जलभराव की समस्या सालों पुरानी है, लेकिन इस बार भी नगर निगम ने इसका कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला। रविवार को बारिश के बाद पुलिया के नीचे का अंडरपास पूरी तरह जलमग्न हो गया। दूधिया, कामकाजी लोग और राहगीर जान जोखिम में डालकर घुटनों तक भरे गंदे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हुए। कई मोटरसाइकिलें बीच पानी में बंद हो गईं, जिन्हें धक्का मारकर बाहर निकालना पड़ा।