ईरानअमेरिका युद्ध से ऐसे बदला तेल का खेल, फरवरी से अबतक का ये है टाइमलाइन

ईरानअमेरिका युद्ध से ऐसे बदला तेल का खेल, फरवरी से अबतक का ये है टाइमलाइन

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक कच्चे तेल बाजार को हिला दिया है. फरवरी में शुरू हुए इस भूराजनीतिक संकट का असर लगातार अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर दिखाई दे रहा है. हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ अंतरिम समझौता खत्म होने संबंधी बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 6% का उछाल देखने को मिला. इससे साफ है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है.

ईरानअमेरिका युद्ध से ऐसे बदला तेल का खेल, फरवरी से अबतक का ये है टाइमलाइन

ब्रेंट और WTI दोनों में तेज़ उछाल

ट्रंप के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5.6% बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई. वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड भी 5.8% चढ़कर 74.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “मेरे हिसाब से यह समझौता खत्म हो चुका है. अब उनसे बातचीत करना समय की बर्बादी है.”

फरवरी: युद्ध की शुरुआत और तेल में पहली बड़ी तेजी

फरवरी के आखिर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव तेजी से बढ़ा. दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों की खबरों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया. निवेशकों को डर था कि यदि हालात और बिगड़े तो दुनिया की तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

मार्च से मई: तनाव कम हुआ, कीमतें भी फिसलीं

इसके बाद दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें शुरू हुईं. युद्ध के और ज्यादा नहीं बढ़ने तथा आपूर्ति सामान्य रहने की उम्मीद से तेल की कीमतों में धीरेधीरे गिरावट आने लगी. ब्रेंट क्रूड फिर से 70 डॉलर के दायरे में लौट आया. बाजार को भरोसा था कि कूटनीतिक प्रयास हालात को संभाल सकते हैं.

जुलाई: फिर बढ़ा तनाव, तेल में 6% उछाल

हालात उस समय फिर बिगड़ गए जब हॉर्मुज स्ट्रेट में तीन जहाजों पर हमले हुए. इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की. इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता अब खत्म हो चुका है, हालांकि बातचीत जारी रह सकती है.

इस बयान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 5.6% बढ़कर 78 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 5.8% चढ़कर 74.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

हॉर्मुज स्ट्रेट बना तनाव की वजह

ईरान और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत 60 दिनों तक जहाजों को हॉर्मुज स्ट्रेट से बिना किसी शुल्क के गुजरने की अनुमति दी गई थी. लेकिन ईरान चाहता था कि जहाज उसके तय किए गए मार्ग से गुजरें और बाद में इस रास्ते के इस्तेमाल पर शुल्क भी वसूला जाए.

मंगलवार को जिन जहाजों पर हमला हुआ, वे ईरान के बताए रास्ते की बजाय ओमान के तट के पास वाले समुद्री मार्ग से गुजर रहे थे. इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया.

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश की आयात लागत पर पड़ सकता है. यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो पेट्रोलडीजल की कीमतों, महंगाई और सरकार के वित्तीय संतुलन पर भी दबाव बढ़ सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार की नजर पूरी तरह पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी है. अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है या हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है. वहीं, यदि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालने में सफल रहते हैं तो बाजार को राहत मिल सकती है.

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