पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ऑटो कंपनियों ने सरकार से की ये बड़ी मांग

पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ऑटो कंपनियों ने सरकार से की ये बड़ी मांग

देश की ऑटोमोबाइल कंपनियों ने पेट्रोलियम मंत्रालय से मांग की है कि पूरे देश के पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले तेल की गुणवत्ता जांचने के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था बनाई जाए. कंपनियों का कहना है कि हाल के महीनों में बड़ी संख्या में वाहन मालिक शिकायत कर रहे हैं कि उनकी गाड़ियों की परफॉर्मेंस पहले जैसी नहीं रही. कई मामलों में वाहन बीच रास्ते बंद हो गए या फिर स्टार्ट ही नहीं हुए.

पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ऑटो कंपनियों ने सरकार से की ये बड़ी मांग

वाहन कंपनियों ने साफ किया है कि इसकी वजह E20 पेट्रोल नहीं है. अगर वाहन E20 के लिए तैयार है, तो इससे इंजन को कोई नुकसान नहीं होता. असली परेशानी तब होती है, जब पेट्रोल में पानी या अन्य अशुद्धियां मिल जाती हैं और वही दूषित ईंधन ग्राहकों तक पहुंचता है. कंपनियों की ओर से की गई जांच में कई बार यह सामने आया कि पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा तय मानकों से अधिक थी. यही कारण है कि कंपनियां अब चाहती हैं कि पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए. इससे यह साफ होगा कि ग्राहकों को वही पेट्रोल मिले, जो भारतीय मानक ब्यूरो के नियमों के अनुरूप हो.

स्वतंत्र संस्था से जांच कराने की मांग

ET ऑटो की रिपोर्ट में इंडस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि फिलहाल पेट्रोल की जांच वही ऑयल मार्केटिंग कंपनियां करती हैं, जो पेट्रोल की सप्लाई भी करती हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। ऐसे में जांच की जिम्मेदारी किसी स्वतंत्र संस्था को दी जानी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहकों का भरोसा बढ़े. BIS के नियमों के अनुसार E20 पेट्रोल में किसी भी तरह के डिटर्जेंट, सिलिकॉन, क्लोरीन वाले रसायन या धातु आधारित एडिटिव्स नहीं मिलाए जाने चाहिए.

पेट्रोल के भंडारण में नहीं हुआ बदलाव

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पिछले दो सालों में पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल की मात्रा लगभग दोगुनी होकर 11 अरब लीटर तक पहुंच गई है. लेकिन इसके मुकाबले पेट्रोल के भंडारण और परिवहन की व्यवस्था में जरूरी बदलाव नहीं किए गए. आज भी वही पुराने टैंकर, पाइपलाइन और अंडरग्राउंड टैंक इस्तेमाल हो रहे हैं, जो सामान्य पेट्रोल के लिए बनाए गए थे. यही वजह है कि ईंधन दूषित होने के मामले बढ़ रहे हैं.

क्या है पेट्रोल की समस्या?

एथेनॉल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पानी को अपनी ओर खींचता है. अगर अंडरग्राउंड टैंकों में बारिश, नमी या किसी अन्य कारण से थोड़ा भी पानी पहुंच जाता है, तो एथेनॉल उस पानी के साथ मिल जाता है. जब टैंक में पानी की मात्रा तय सीमा से ज्यादा हो जाती है, तो फेज सेपरेशन की स्थिति बनती है. इसमें पानी और एथेनॉल नीचे जमा हो जाते हैं, जबकि पेट्रोल ऊपर की परत में रह जाता है. ऐसी स्थिति में जब पेट्रोल पंप से ईंधन निकाला जाता है, तो कुछ वाहनों में नीचे जमा पानी और एथेनॉल वाला मिश्रण पहुंच सकता है. इससे इंजन स्टार्ट नहीं होता, वाहन चलतेचलते बंद हो सकता है या इंजन की कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है.

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