जम्मू: जम्मू एवं कश्मीर के जम्मू संभाग में लगातार चौथे दिन हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हालात गंभीर बने हुए हैं। भारी बारिश से कई जगह भूस्खलन, मलबा गिरने और पहाड़ों से पत्थर आने की घटनाओं के चलते बुधवार सुबह जम्मूश्रीनगर नेशनल हाइवे पर ट्रैफिक पूरी तरह रोक दिया गया। अधिकारियों ने लोगों से मौसम सामान्य होने और सड़क सुरक्षित घोषित होने तक इस मार्ग पर यात्रा नहीं करने की सलाह दी है। ट्रैफिक डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, 250 किलोमीटर लंबा जम्मूश्रीनगर नेशनल हाइवे, जो कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र ‘ऑल वेदर रोड’ है, बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे दोनों ओर से बंद कर दिया गया।

मलबा हटाने के लिए मशीनें और कर्मचारी तैनात
बता दें कि लगातार बारिश के कारण उधमपुर से बनिहाल के बीच करीब एक दर्जन स्थानों पर भूस्खलन, मलबा गिरने और पहाड़ों से पत्थर आने की घटनाएं हुईं। सड़क से मलबा हटाने के लिए संबंधित एजेंसियों ने मशीनें और कर्मचारी मौके पर तैनात कर दिए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 153 मिलीमीटर बारिश कठुआ जिले में दर्ज की गई। इसके बाद सांबा में 133 मिलीमीटर, उधमपुर में 112.6 मिलीमीटर, जम्मू में 62.1 मिलीमीटर, कटरा में 58.5 मिलीमीटर, पुंछ में 51 मिलीमीटर और राजौरी में 40.5 मिलीमीटर बारिश हुई। विभाग ने गुरुवार शाम तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने का पूर्वानुमान जताया है।
बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 23 की मौत
लगातार हो रही बारिश के कारण जम्मूकश्मीर की लगभग सभी नदियां और जल स्रोत उफान पर हैं। कई निचले इलाकों में अचानक आई बाढ़ से लोगों के घरों और दुकानों में पानी भर गया है। रविवार से अब तक पुंछ, राजौरी और डोडा जिलों में अलगअलग स्थानों पर आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार ऑपरेशन चला रही हैं। भारी बारिश से सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। कई सड़कें और पुल बह गए हैं, जबकि अनेक क्षेत्रों में बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है।
प्रभावित जिलों में राहत एवं बचाव कार्य तेज
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित जिलों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन, पुलिस, SDRF, NDRF और अन्य एजेंसियों की टीमें दिनरात राहत कार्य में जुटी हैं। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, सड़कों की आवाजाही बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है और नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है। लगातार खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलें। नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
पूरे घटनाक्रम पर है सरकार की नजर
अधिकारियों ने बताया कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना, आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस बीच, जम्मूकश्मीर के जल शक्ति मंत्री जावेद अहमद राणा और युवा सेवा एवं खेल मंत्री सतीश शर्मा ने राजौरी जिले का दौरा कर बाढ़ की स्थिति, राहत कार्यों और आवश्यक सेवाओं की बहाली की समीक्षा की। दोनों मंत्री राजौरी के सरकारी बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल में बनाए गए राहत एवं पुनर्वास केंद्र भी पहुंचे। वहां उन्होंने राहत शिविर में रह रहे परिवारों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और जरूरी सुविधाओं का जायजा लिया।
असम में बाढ़ ने मचाई तबाही 6 लाख बेघर
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पिछले 24 घंटों में असम में बाढ़ से कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है, जिससे मरने वालों की कुल संख्या 31 हो गई है।
ASDMA की बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में शिवसागर जिले में 13, चराइदेव में पांच, गोलाघाट में दो और जोरहाट में एक व्यक्ति की मौत हुई। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जिसमें गोलाघाट, कामरूप, होजई, डिब्रूगढ़, विश्वनाथ, धेमाजी, सोनितपुर, उदलगुरी, नागांव, चराइदेव, कामरूप , जोरहाट, तिनसुकिया, कार्बी आंगलोंग, लखीमपुर और शिवसागर सहित 16 जिलों में 5.64 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
शिवसागर में 3.59 लाख प्रभावित
बाढ़ का पानी 24,210.35 हेक्टेयर फसल क्षेत्र में भर गया है और 44 राजस्व मंडलों के 872 गांवों को प्रभावित किया है। शिवसागर सबसे बुरी तरह प्रभावित जिला है, जहां 3.59 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद जोरहाट , चराइदेव , डिब्रूगढ़ और गोलाघाट का स्थान है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा स्थापित 273 राहत शिविरों और राहत वितरण केंद्रों में 1.14 लाख से अधिक लोगों ने शरण ली है।
NDRF, SDRF संग थल और वायु सेना जुटी
इस बीच, भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, NDRF, SDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। 19 जुलाई को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से मिली सूचना के बाद, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ने असम के जोरहाट जिले के तेओक राजस्व मंडल के अंतर्गत सेलेन टी एस्टेट के पास सेलेन घाट से बाढ़ प्रभावित पांच लोगों को बचाया।
कई लोगों का इलाज जारी
इंस्पेक्टर केबी नाथ के नेतृत्व में और एन.के. की देखरेख में NDRF की एक टीम… NDRF की पहली बटालियन के डिप्टी कमांडेंट तिवारी को प्रभावित इलाके में तैनात किया गया था।
खोज और बचाव दल ने पानी में डूबे अपने घर की छत पर फंसी एक युवा लड़की, तेज़ बहाव में बह रहे एक व्यक्ति और बाढ़ के पानी के बीच फंसी तीन महिलाओं को बचाया। ठंडे बाढ़ के पानी में लंबे समय तक रहने के कारण एक बुजुर्ग महिला को गंभीर हाइपोथर्मिया हो गया था और उनकी हालत नाजुक थी। बचाव दल ने सभी पांचों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, उन्हें अस्पताल ले जाने से पहले जरूरी इलाज दिया , और आगे के इलाज और पुनर्वास के लिए उन्हें एक तय राहत केंद्र में सुरक्षित पहुंचाया।