क्या भारत में थी दुनिया की पहली सभ्यता? इतिहासकार के दावे से छिड़ी नई बहस, लोथल बंदरगाह को बताया सबसे बड़ा सबूत..

क्या भारत में थी दुनिया की पहली सभ्यता? इतिहासकार के दावे से छिड़ी नई बहस, लोथल बंदरगाह को बताया सबसे बड़ा सबूत..
क्या भारत में थी दुनिया की पहली सभ्यता? इतिहासकार के दावे से छिड़ी नई बहस, लोथल बंदरगाह को बताया सबसे बड़ा सबूत..

Civilisation in India: प्राचीन सभ्यताओं की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। समुद्री इतिहासकार निक कॉलिंस ने दावा किया है कि दुनिया की पहली विकसित सभ्यता मेसोपोटामिया नहीं, बल्कि भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुई थी। उन्होंने गुजरात के लोथल को इस दावे का अहम प्रमाण बताते हुए कहा कि यहां दुनिया के सबसे प्राचीन ज्ञात डॉकयार्ड (बंदरगाह) में से एक मौजूद था।

क्या है इतिहासकार का दावा?

निक कॉलिंस का कहना है कि लंबे समय तक पश्चिमी इतिहास लेखन में मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) को सभ्यता का जन्मस्थल बताया जाता रहा, जबकि उपलब्ध पुरातात्विक और समुद्री व्यापार से जुड़े साक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप की उन्नत सभ्यता की ओर संकेत करते हैं।

उनके अनुसार सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नगरों में सुनियोजित सड़कें, जल निकासी व्यवस्था, मानकीकृत ईंटें, व्यापारिक नेटवर्क और विकसित शहरी व्यवस्था मौजूद थी, जो उस समय के लिए अत्यंत उन्नत मानी जाती है।

लोथल को बताया सबसे बड़ा प्रमाण

कॉलिंस ने गुजरात के लोथल में मिले विशाल ईंट-निर्मित ढांचे को प्राचीन डॉकयार्ड बताया। उनका कहना है कि यह समुद्री व्यापार के लिए विकसित बंदरगाह था, जहां से जहाजों का संचालन होता था।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार भी लोथल सिंधु सभ्यता का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था और यहां समुद्री गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं। हालांकि, इस संरचना को लेकर विद्वानों के बीच अलग-अलग मत भी रहे हैं और इसके स्वरूप पर शोध जारी है।

यूरोप से पहले विकसित समुद्री व्यापार?

इतिहासकार का दावा है कि लोथल जैसी उन्नत समुद्री संरचना उस समय यूरोप में मौजूद नहीं थी। उनके अनुसार भारतीय उपमहाद्वीप से पश्चिम एशिया तक व्यापारिक संपर्क स्थापित थे और मोतियों, आभूषणों समेत कई वस्तुओं का निर्यात किया जाता था।

आर्य आक्रमण सिद्धांत पर भी उठाए सवाल

निक कॉलिंस ने अपने लेख में आर्य आक्रमण सिद्धांत पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भारतीय सभ्यता के विकास को लंबे समय तक पश्चिमी नजरिए से देखा गया। हालांकि, इस विषय पर इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और आनुवंशिकी विशेषज्ञों के बीच आज भी विभिन्न मत मौजूद हैं और यह शोध का विषय बना हुआ है।

इतिहासकारों की क्या राय है?

प्राचीन सभ्यताओं की उत्पत्ति और विकास को लेकर अकादमिक जगत में कई सिद्धांत प्रचलित हैं। अधिकांश मुख्यधारा के इतिहासकार मेसोपोटामिया, मिस्र, सिंधु घाटी और चीन को दुनिया की प्रारंभिक प्रमुख सभ्यताओं में शामिल मानते हैं। इनमें से किसे “पहली सभ्यता” कहा जाए, इस पर अब भी शोध और बहस जारी है।

नोट: निक कॉलिंस के विचार उनके व्यक्तिगत ऐतिहासिक विश्लेषण पर आधारित हैं। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इन्हें इतिहासकारों के बीच सर्वसम्मत निष्कर्ष नहीं माना जाता। सभ्यताओं की उत्पत्ति, आर्य सिद्धांत और लोथल के स्वरूप जैसे विषयों पर अकादमिक जगत में विभिन्न मत मौजूद हैं।

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