न धुआं, न शोर, ड्रोन आसमान में कैसे बनाते हैं आकार? अयोध्या में कहेंगे राम कहानी​

न धुआं, न शोर, ड्रोन आसमान में कैसे बनाते हैं आकार? अयोध्या में कहेंगे राम कहानी​

Diwali Drone Show:दिवाली के मौके पर राम नगरी अयोध्या में सिर्फ दीपोत्सव का ही आयोजन नहीं होता. पटाखों के साथ आसमान में आधुनिक तकनीक का नजारा भी दिखता है. स्वदेशी ड्रोन शो के जरिए होने वाला ड्रोन शो आकर्षित करता है. इनके जरिए देश की संस्कृति दिखाने के साथ प्रभु श्रीराम के प्रसंगों को दिखाया जाता है, लेकिन सवाल है कि आसमान में ये ड्रोन कैसे रंगबिरंगी अलगअलग आकृति बनाते हैं? इन्हें कैसे ऑपरेट किया जाता है?

ड्रोन शो असल में उड़ती हुई पिक्सल स्क्रीन है. हर ड्रोन आसमान का एक पिक्सल है और सैकड़ोंहजारों ड्रोन मिलकर तस्वीर बनाते हैं. यह इतनी भी आसान प्रक्रिया नहीं है.

आसमान में आकार कैसे बनते हैं ड्रोन?

  1. डिजाइन: पहले कलाकार थ्रीडी एनिमेशन बनाते हैं, जैसे राम, हनुमान या धनुष. सॉफ्टवेयर उसे हजारों बिंदुओं में बांट देता है.
  2. फ्लाइट प्लान: हर ड्रोन को हर पल की अपनी जगह , रंग और समय तय करके दे दिया जाता है, यानी हर ड्रोन के पास पूरी कोरियोग्राफी पहले से होती है.
  3. सटीक लोकेशन: ड्रोन में RTKGPS जैसी तकनीक होती है, जो स्थिति को कुछ सेंटीमीटर तक सही रखती है. इसी वजह से हजारों ड्रोन आपस में टकराए बिना पासपास उड़ते हैं.

  4. LED कलर: हर ड्रोन में तेज LED लाइट होती है, जो लाखों रंग बदल सकती है. उसका रंग भी प्रोग्राम में पहले से तय होता है.
  5. कंट्रोल रूम: जमीन पर एक सेंट्रल सिस्टम सबको रेडियो सिग्नल से एक साथ शुरू करता है और सबकी बैटरी, सिग्नल और पोजिशन पर नजर रखता है. कोई ड्रोन गड़बड़ करे तो वह खुद सुरक्षित जगह उतर जाता है.
  6. सीमा: बैटरी की वजह से एक शो आमतौर पर 10 से 15 मिनट का ही होता है. हवा तेज हो या बारिश हो तो शो टालना पड़ता है.

मतलब ड्रोन हाथ से नहीं चलाए जाते, पूरा शो पहले से लिखी हुई एक डिजिटल स्क्रिप्ट है, जिसे कंप्यूटर एकदम सटीक तरीके से चलाता है.

ड्रोन शो.

अयोध्या में ड्रोन शो की परंपरा

अयोध्या के दीपोत्सव में ड्रोन शो की शुरुआत कुछ साल पहले हुई थी. तब उत्तर प्रदेश सरकार ने 500 ड्रोन से 10 से 12 मिनट का शो करवाया, जिसमें रामायण और राम के अयोध्या लौटने की कथा दिखाई गई, तब से यह हर साल दीपोत्सव का हिस्सा बन गया और ड्रोन की संख्या बढ़ती गई.

2025 में राम और हनुमान की छवियों वाले ड्रोन शो ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. उसी आयोजन में हनुमान, श्रीराम, धनुष और रावण के दृश्य भी बने. 26 लाख से ज्यादा दीये एक साथ जलाकर दो गिनीज विश्व रिकॉर्ड भी बने.

2026 का दीपोत्सव राज्य सरकार का आयोजन है, जिसे 2017 में शुरू किया गया था. इस बार राम की पैड़ी और आसपास के घाटों पर 33 लाख दीयों का लक्ष्य है. एक रिपोर्ट के मुताबिक 2,100 ड्रोन का शो भी होना है, जिसे जमघाट पर दो दिन बाद दोहराए जाने की संभावना है.

दिल्ली में 2025 में कर्तव्य पथ पर 1.5 लाख से ज़्यादा मिट्टी के दीयों के साथ ड्रोन और लेजर शो हुआ. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसे शहर की पर्यावरणअनुकूल दिवाली की कोशिश का हिस्सा बताया गया, जो पटाखों का एक खूबसूरत विकल्प है.

Throwback to Deepotsav in Ayodhya with UP Tourism. 🪔

In the city where Diwali began, we told the story of Bhagwan Rams return in the sky. 🙏

Excited to see the Ayodhya drone show again this Diwali? ✨

#AyodhyaDeepotsav #DiwaliDroneShow #BotLabDynamics https://t.co/c0OGV2ClNj

— BotLab Dynamics November 4, 2026

ड्रोन शो क्यों पसंद किए जा रहे हैं?

  • धुआं और शोर नहीं: हवा प्रदूषित नहीं होती और पालतू जानवरों, बुज़ुर्गों व बच्चों को परेशानी कम होती है.
  • कहानी कह सकते हैं: पटाखे रंग और धमक देते हैं, जबकि ड्रोन रामवनवासवापसी जैसी पूरी कथा बना सकते हैं.
  • दोहराने लायक: एक बार डिजाइन बन जाए तो अलग शहरों में बारबार चल सकता है.
  • कमी: खर्च ज्यादा है. एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से एक शो की कीमत 30 लाख रुपये तक जा सकती है. मौसम पर निर्भरता भी बड़ी सीमा है.

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