उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासत तेज है. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद अब SSR और फॉर्म6, फॉर्म7 को लेकर भी आरोपप्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में बीजेपी और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी अखिलेश ने सवाल किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ 27 लाख हिंदू वोटरों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं. अखिलेश ने पूछा कि मुख्यमंत्री को यह आंकड़ा कैसे पता चला? क्या चुनाव आयोग ने पूरा डेटा मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ साझा किया है?

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि वोट का अधिकार छीनने के लिए पहले SIR कराया गया, फिर SSR कराया जा रहा है और अब फॉर्म7 के जरिए नाम काटने की साजिश हो रही है. उन्होंने फॉर्म6 और फॉर्म7 में बदलाव को भी फर्जी वोट बढ़ाने की कोशिश बताया. अखिलेश ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी.
1.27 करोड़ हिंदू वोटरों के नाम गायब होने पर सवाल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में दावा किया था कि मतदाता सूची से 1 करोड़ 27 लाख हिंदू वोटरों के नाम गायब हैं. मुख्यमंत्री के इस बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं. अखिलेश यादव ने पूछा कि मुख्यमंत्री को कैसे पता चला कि इतने वोटर गायब हैं? उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग ने पूरा डेटा मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ साझा किया है. अखिलेश ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम गायब होने की जानकारी मुख्यमंत्री के पास कहां से आई, इसका आधार क्या है और उन्हें यह आंकड़ा किसने उपलब्ध कराया?
SIR, SSR और फॉर्म7 को लेकर बीजेपी पर आरोप
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि वोट देने का अधिकार छीनने के लिए पहले SIR कराया गया और फिर SSR कराया जा रहा है. उन्होंने फॉर्म7 को लेकर भी साजिश का आरोप लगाया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। दरअसल, फॉर्म7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने में होता है, जबकि फॉर्म6 नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए है. अखिलेश का आरोप है कि इन प्रक्रियाओं के जरिए मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा रही है.
फॉर्म6 और फॉर्म7 में बदलाव पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने फॉर्म6 और फॉर्म7 में किए जा रहे बदलावों पर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन बदलावों का मकसद फर्जी वोट बढ़ाना है. उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता जरूरी है. चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न कटे और फर्जी तरीके से किसी का नाम भी शामिल न हो. दरअसल, चुनाव आयोग ने SIR के दौरान ऑनलाइन फॉर्म6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणापत्र को अलग करने का फैसला किया है. अब ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म6 और SIR से जुड़ी घोषणा अलगअलग हिस्सों में उपलब्ध हैं.
2027 में बीजेपी की विदाई का दावा
मतदाता सूची के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने के साथ ही अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता जानती है कि बीजेपी के नेता यूपी में आए थे और अब यहीं से बाहर जाएंगे. अखिलेश ने कहा कि प्रदेश की जनता बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी. इससे पहले भी वह मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित वोट कटने के मुद्दे पर चुनाव आयोग के सामने अपनी शिकायतें रखने की बात कह चुके हैं.