
कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: जुलाई की शुरूआत होते ही लखनऊ पुलिस, साइबर क्राइम थाना, क्राइम ब्रांच व साइबर क्राइम सेल ने ताबड़तोड़ तीन अंरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का खुलासा किया। तीनों गिरोह के तार सीधे तौर पर गुजरात के अहमदाबाद से जुड़े मिले। पुलिस ने यह तीनों फर्जी कॉल सेंटर एक जुलाई को समिट बिल्डिंग, 16 जुलाई को ओमेक्स आर2 और 22 जुलाई को साइबर हाइट्स में पकड़ा है। इन सभी गिरोह में दो के संचालक अहमदाबाद से नेटवर्क संचालित कर रहे थे। तो साइबर हाइट्स में पकड़े गये गिरोह के सरगना की ट्रेनिंग अहमदाबाद में हुई थी। वहीं से आकर उसने नेटवर्क खड़ा किया था। समिट बिल्डिंग में पकड़े गए काल सेंटर का मास्टरमाइंड चार्ल्स तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। उसकी सही लोकेशन भी एजेंसियां नहीं तलाश पाई हैं। वहीं, ओमेक्स आर2 के यश व प्रकाश वर्मा के बारे में भी कोई सुराग नहीं लगा है।
लखनऊ पुलिस, साइबर क्राइम थाना, क्राइम ब्रांच व साइबर क्राइम सेल की संयुक्त टीम ने एक जुलाई को विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग में छापेमारी कर 119 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 16 जुलाई ओमैक्स आर2 में कार्रवाई के दौरान सात आरोपित पकड़े गए। फिर 22 जुलाई को साइबर हाइट्स में चल रहे फर्जी काल सेंटर से चार लोगों की गिरफ्तारी हुई है। तीनों मामलों की जांच में सामने आया कि इनका संचालन या प्रशिक्षण किसी न किसी रूप में अहमदाबाद से जुड़ा हुआ था।
ट्रेनिंग लिया, फिर खोला कॉल सेंटर
जांच में सामने आया कि साइबर हाइट्स का संचालक अहमदाबाद में प्रशिक्षण लेने के बाद लखनऊ लौटा और यहां विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाला कॉल सेंटर शुरू किया। वहीं, समिट और ओमैक्स प्रकरण में भी संचालन की डोर अहमदाबाद से जुड़ी होने के संकेत मिले हैं। पुलिस के मुताबिक अहमदाबाद में सक्रिय कुछ संगठित गिरोह विदेशी नागरिकों को ठगने के तौरतरीकों की ट्रेनिंग देते हैं। काल स्क्रिप्ट, तकनीकी साफ्टवेयर, वायस प्रोसेस और भुगतान की व्यवस्था तक वहीं से तैयार कराई जाती है।
हवाला से जुटाई जाती थी ठगी की रकम
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी से जुटाई गई रकम हवाला नेटवर्क के जरिए आरोपितों तक पहुंचाई जाती थी। इसके लिए अहमदाबाद का नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। हालांकि पूरे नेटवर्क का अहम किरदार माने जा रहे चार्ल्स तक पुलिस की पहुंच अभी नहीं बन सकी है। जांच एजेंसियों के पास उसके बारे में कई इनपुट हैं, लेकिन अब तक उसकी सटीक लोकेशन नहीं मिल पाई है। पुलिस की कई टीमें तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर उसकी तलाश में जुटी हैं। चार्ल्स की गिरफ्तारी होने पर लखनऊ में पकड़े गए साइबर ठगी के नेटवर्क के कई और राज खुलेंगे। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। विदेशी नागरिकों को निशाना बनाने वाले पूरे गिरोह की परतें सामने आ सकती हैं।