
बरेली, अमृत विचार। शहर में एलपीजी संकट लगभग खत्म हो चुका है। इससे उपभोक्ताओं को राहत है, लेकिन कमर्शियल सिलिंडरों की बुकिंग में आए अजीबोगरीब बदलाव ने वितरकों की चिंता बढ़ा दी है। लगभग हर गैस एजेंसी में कमर्शियल सिलिंडर की मांग पहले के मुकाबले अचानक 50 फीसदी तक गिर गई है। इतनी बड़ी संख्या में व्यावसायिक उपभोक्ता कहां गायब या शिफ्ट हो गए, गैस एजेंसियां अब इसकी वजह तलाशने में जुटी हैं।
कई वितरक बताते हैं कि कमर्शियल सिलिंडर की बुकिंग कम होने से कंपनियां और वे इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि उनका लाभ कम हो गया है। इससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। वर्तमान में 19 किलो का कमर्शियल सिलिंडर 2,990.50 रुपये का है, जिस पर एजेंसियों को 150 से 180 रुपये तक का कमीशन मिलता है। इसके उलट, सरकारी नियंत्रण वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलिंडर का दाम 960 रुपये है। इस पर वितरक को महज 70 से 74 रुपये कमीशन मिलता है। बिक्री घटने से वितरकों का मुनाफा सीधे आधा रह गया है।
घरेलू गैस की कालाबाजारी की आशंका
कुछ वितरकों का मानना है कि गैस संकट खत्म होने से घरेलू सिलिंडर की कालाबाजारी बढ़ गई है। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलिंडर की गैस चोरीछिपे कमर्शियल सिलिंडर में भर बेची जा रही है। इस वजह से एजेंसियों में कमर्शियल सिलिंडर की डिमांग घट गई है। एलपीजी संकट के समय जब कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति कम की गई थी, तब लोग लगातार मांग कर रहे थे। एलपीजी संकट खत्म होते ही मांग बंद हो गई।
अपनाए गए दूसरे विकल्पों का असर तो नहीं
एलपीजी संकट के समय बड़ी संख्या में छोटे और बड़े कारोबार प्रभावित हुए तो कारोबारियों ने सिलिंडर की जगह अंगीठी, कोयला भट्टी, डीजल भट्टी और इंडक्शन आदि का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। बाद में जब कमर्शियल सिलिंडर के दाम बढ़े तो कारोबारियों ने अपनी निर्भरता इन्हीं विकल्पों पर बना ली। अब गैस सुलभ होने पर भी वे इन्हीं विकल्पों के जरिये कारोबार कर रहे हैं।
बंद गैस कनेक्शनों को दोबारा चालू कराकर घरेलू सिलिंडरों की कालाबाजारी हो रही है। अब फास्ट फूड कॉर्नर और रेस्टोरेंट में भी व्यावसायिक के बजाय घरेलू सिलिंडर इस्तेमाल हो रहे हैं। 14.2 किलो के घरेलू और 19 किलो के कमर्शियल सिलिंडर के वजन में मात्र 5 किलो का अंतर है, जबकि दामों में तीन गुना का भारी फर्क है। इसी वजह से कमर्शियल सिलिंडरों की मांग घटी है। लता सोलंकी, अध्यक्ष बरेली एलपीजी एसोसिएशन।
खाद्य एवं पूर्ति विभाग की टीमें रेस्टोरेंटों, ढाबों और फास्ट फूड कॉर्नरों पर समयसमय पर चेकिंग करती है। यदि कोई भी व्यावसायिक स्थान पर घरेलू सिलिंडर का इस्तेमाल या ओवररेटिंग में बिक्री करते पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मनीष कुमार, डीएसओ।