नई दिल्ली: जंतर मंतर पर नएनए अंदाज में लोग भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं, जोश हवा में है। भीड़ का ट्रैफिक और भी कुशलता से कंट्रोल किया जा रहा है, कुछकुछ देर में नारों की गूंज की लहर उठ रही है। सोनम वांगचुक अनशन खत्म कर चुके हैं, इसका लोग शुक्र मना रहे हैं। मांगें को सरकार अब सुन रही है, इसका जश्न मना रहे हैं। ‘मगर मांगें पूरी नहीं, तो यूथ ब्रिग्रेड हटेगी नहीं, चाहे यूनिवर्सिटी रोके या घरवाले’, यही जवाब हर किसी के पास है।

JNU और जामिया यूनिवर्सिटी ने भी की छात्रों से अपील
दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी प्रशासन और जामिया यूनिवर्सिटी ने भी स्टूडेंट्स और टीचर्स को प्रदर्शन स्थल से दूर रहने की अपील की है। शुक्रवार को जेएनयू प्रशासन ने डीयू की तरह ही X हैंडल से सार्वजनिक प्रदर्शनों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए अलर्ट किया। मगर स्टूडेंट्स इस अपील को अनसुना कहते हुए कहते हैं कि ये अपील GenZ के आंदोलन का सरकार पर दबाव दिखाती हैं।
DU छात्र ने बताई प्रदर्शन में आने की वजह
शुक्रवार को जंतर मंतर पहुंचे डीयू से मैथ्स ऑनर्स के स्टूडेंट राज कहते हैं, मैं यहां इसलिए हूं, क्योंकि इस आंदोलन को अपनी नजर से समझना चाहता हूं। तो डीयू रोक क्यों रही है? ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सरकार के दबाव में? मैंने सोशल मीडिया में दोनों पहलू दिखे हैं, मगर यहां आकर देखता हूं कि मांगें जायज हैं। जो पीएम ने अब कहा है, वो पहले क्यों नहीं बोले ? यह सिर्फ NEET नहीं, पूरी एजुकेशन सिस्टम का मसला है।
जेएनयू छात्र ने भी रखी अपनी राय
डीयू के सोशियोलॉजी ऑनर्स के स्टूडेंट अर्णव कहते हैं, हमें तो प्रदर्शन से दूर रहने को कहा, पर NEP के प्रावधानों को लागू करने में इन्फ्रास्ट्रक्चर, टीचर्स, पढ़ाई का लोड, गैर जरूरी कोर्स से आई चुनौतियों पर शिक्षा मंत्रालय में समाधान क्यों नहीं मांगा जा रहा? वहीं, जेएनयू के पीजी स्टूडेंट दीपक कुमार कहते हैं, जेएनयू प्रशासन अब स्टूडेंट को हर प्रदर्शन से रोकता है, जबकि यह कैंपस अपने लोकतांत्रिक प्रदर्शनों और अपने हेल्दी डिबेट वाले माहौल के लिए जाना जाता था।