गांव में इंसानियत शर्मसार! प्रेम-प्रसंग के शक में महिला और युवक के साथ अमानवीय व्यवहार…

गांव में इंसानियत शर्मसार! प्रेम-प्रसंग के शक में महिला और युवक के साथ अमानवीय व्यवहार…
गांव में इंसानियत शर्मसार! प्रेम-प्रसंग के शक में महिला और युवक के साथ अमानवीय व्यवहार…

झारखंड राज्य के पाकुड़ जिले में स्थित अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के बूढ़ीडूबा गांव से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है. प्रेम-प्रसंग से नाराज पति और उसके सहयोगियों ने विवाहिता और एक युवक को पकड़कर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया. आरोप है कि दोनों के कपड़े फाड़कर उन्हें अर्धनग्न अवस्था में पूरे गांव में घुमाया गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने पीड़ितों को ग्रामीणों के कब्जे से मुक्त कराया और मेडिकल जांच के लिए भेज दिया.

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी

पीड़ित महिला के बयान के आधार पर अमड़ापाड़ा थाना में शिकायत दर्ज की गई है. मामले में 7 नामजद समेत 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है.

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने गांव पहुंचकर बंधक बनाए गए प्रेमी जोड़े को अपनी सुरक्षा में लिया. पुलिस इंस्पेक्टर सह थाना इंचार्ज अनूप रोशन भंगरा, सब इंस्पेक्टर चंदन कुमार सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी गांव पहुंचे. इस दौरान एसडीपीओ विजय कुमार भी अमड़ापाड़ा पहुंचे और मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला का ससुराल और मायके दोनों अमडापाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत अगल बगल ही है, जबकि प्रेमी साहेबगंज जिले के बोरियो प्रखंड का है. पीड़िता को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित करने का काम उसके पति के इशारे पर किया गया. हालांकि इस मामले में पीड़िता के बयान पर 49/2026 के तहत आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.

ग्राम प्रधान की भूमिका पर उठे सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम प्रधान के संज्ञान में आने के बाद भी इस तरह की अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया. प्रधान ने किसी भी प्रकार की कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी. इसके बाद प्रधान की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे.

पंचायत के मुखिया ने क्या कहा?

पंचायत के मुखिया साहेबजन टुडू ने इस शर्मनाक घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे देश का संविधान किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता. अगर किसी भी प्रकार की कोई समस्या है तो हमें प्रशासन के पास जाना चाहिए. इस सुनियोजित कांड की जितनी निंदा की जाय कम है. आदिवासी संस्कृति और नारी का सम्मान हर हाल में होना चाहिए. ऐसा कोई भी काम नहीं होना चाहिए जिससे पूरे समाज को शर्मसार होना पड़े.

घटना से जुड़े दर्जनों वीडियो क्लीप फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हैं. अब देखना होगा कि इस सुनियोजित कांड को अंजाम देने वाले अन्य लोगों की गिरफ्तारी कब तक होती है. इस निंदनीय घटना ने संपूर्ण आदिवासी समुदाय के साथ-साथ समाज के सभी वर्ग को शर्मसार कर दिया है.

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