
Basant Panchmi 2026: बसंत पंचमी का पर्व हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. (जब चंद्रमा दिन-प्रतिदिन बढ़ते हैं, उस समय को शुक्ल पक्ष कहते है) इस दिन ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती पूजा अर्चना की जाती है. ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: के अनुसार, इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन बन रहे कई शुभ योग सरस्वती पूजा को और भी विशेष बना रहे हैं. इन शुभ योग का सकारात्मक प्रभाव लोगों के जीवन पर पड़ सकता है.
: बसंत पंचमी 2026 की तिथि
पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 22 जनवरी 2026 को रात 01 बजकर 18 मिनट से होगी. वहीं, पंचमी तिथि का समापन 24 जनवरी 2026 को रात 12 बजकर 08 मिनट पर होगा. उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए, बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को मनाया जाएगा.
सरस्वती पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा के लिए शुभ समय का विशेष महत्व होता है. पंचांग (चौघड़िया) के अनुसार, सुबह 07 बजकर 58 मिनट से सुबह 10 बजकर 40 मिनट तक का समय सरस्वती पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है.
23 जनवरी 2026 का चौघड़िया
चर – सामान्य: 06:36 AM से 07:58 AM
लाभ – उन्नति: 07:58 AM से 09:19 AM
अमृत – सर्वोत्तम: 09:19 AM से 10:40 AM
चर – सामान्य: 04:05 PM से 05:27 PM
काल – हानि (काल वेला): 10:40 AM से 12:01 PM
शुभ – उत्तम: 12:01 PM से 01:23 PM
रोग – अमंगल: 01:23 PM से 02:44 PM
उद्वेग – अशुभ: 02:44 PM से 04:05 PM
इस दिन से बसंत ऋतु का शुभारंभ
इस दौरान श्रद्धालु अपने घरों, स्कूलों, कॉलेजों और कार्यस्थलों पर मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करते हैं तथा ज्ञान, विद्या और बुद्धि की प्राप्ति की कामना करते हैं. पूजा के समय देवी को सिंदूर, पुष्प, श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है और गुलाल चढ़ाने की भी परंपरा है. मान्यता है कि इसी दिन से बसंत ऋतु का औपचारिक शुभारंभ होता है.
बसंत पंचमी 2026 पर बन रहा है शुभ योग
23 जनवरी 2026, शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा का गोचर मीन राशि में होगा. वहीं, चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु ग्रह की स्थिति होने के कारण गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है. ज्योतिष शास्त्र में यह योग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. गुरु और चंद्रमा का यह विशेष संयोग विद्या, बुद्धि और मानसिक विकास को बढ़ाने वाला होता है.
बसंत पंचमी का यह दिन छात्रों के लिए अत्यंत शुभ
बसंत पंचमी का यह दिन विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. बसंत पंचमी के दिन सुबह 06 बजकर 36 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक का समय शिक्षा आरंभ, विद्यारंभ संस्कार और नए शैक्षणिक कार्यों की शुरुआत के लिए श्रेष्ठ रहेगा.
बसंत पंचमी पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और पीले रंग का वस्त्र बिछाएं.
पूजा के समय पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.
पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें और दीप प्रज्वलित करें.
मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को विधिपूर्वक स्थापित करें.
मां सरस्वती का ध्यान करते हुए उनका आह्वान करें और मंत्र जाप के साथ पूजा संपन्न करें.
बसंत पंचमी पर इन मंत्रों का करें जाप
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयंकरी.
वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥
ॐ वाग्देव्यै च विद्महे कामराजाय धीमहि.
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि॥
सरस्वती पूजन ध्यान मंत्र
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥



