विश्वप्रसिद्ध पुरी रथयात्रा बनेगी UNESCO की सांस्कृतिक विरासत? INTACH ने केंद्र और ओडिशा सरकार को लिखा पत्र

विश्वप्रसिद्ध पुरी रथयात्रा बनेगी UNESCO की सांस्कृतिक विरासत? INTACH ने केंद्र और ओडिशा सरकार को लिखा पत्र
विश्वप्रसिद्ध पुरी रथयात्रा बनेगी UNESCO की सांस्कृतिक विरासत? INTACH ने केंद्र और ओडिशा सरकार को लिखा पत्र

भुवनेश्वर। भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास के पुरी चैप्टर ने केंद्र सरकार और ओडिशा सरकार से भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक पुरी रथयात्रा को यूनेस्को की ‘मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का आग्रह किया है।

INTACH पुरी चैप्टर के संयोजक सुबास चंद्र रथ ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि भारत की 16 सांस्कृतिक परंपराओं को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में स्थान मिल चुका है, लेकिन लगभग 800 वर्ष पुरानी पुरी रथयात्रा अब भी इस वैश्विक सूची में शामिल नहीं हो सकी है। उन्होंने इसे भारत की जीवंत और अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अनेक पारंपरिक विधाओं और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम है। इसमें नबकलेबर अनुष्ठान, महाराणा और भोई सेवकों द्वारा रथ निर्माण की पारंपरिक कला, भक्ति संगीत, मंदिर कला, धार्मिक अनुष्ठान और बिना किसी जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के भेदभाव के लाखों श्रद्धालुओं द्वारा रथ खींचने की परंपरा शामिल है।

INTACH पुरी चैप्टर के सहसंयोजक संजय कुमार बरल ने रथयात्रा को ‘मानवता की विरासत’ बताते हुए राज्य और केंद्र सरकारों से आग्रह किया कि वे उचित माध्यमों से यूनेस्को को एक नामांकन दस्तावेज सौंपें। उन्होंने कहा, “यूनेस्को से मान्यता मिलने पर न केवल इस त्योहार को वैश्विक पहचान मिलेगी बल्कि इसके दस्तावेजीकरण, संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारप्रसार के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।” 

मई 2026 में गठित INTACH पुरी चैप्टर ने इस उद्देश्य से राज्यव्यापी जनजागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है। इसके तहत रथयात्रा से जुड़ी मौखिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण किया जाएगा और स्कूलों व कॉलेजों में कार्यशालाओं के माध्यम से यूनेस्को नामांकन के लिए जनसमर्थन जुटाया जाएगा।

इस पहल का कई विशेषज्ञों, विरासत संरक्षण से जुड़े विद्वानों और INTACH के आजीवन सदस्यों ने समर्थन किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक विरासत प्रेमियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की।

ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।

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