
Mutual Funds : डिजिटल क्रांति और फिनटेक के इस दौर में कई तरह के लोन आसानी से मिल जाते हैं. जैसे पर्सनल लोन, होम लोन, कार लोन, प्रॉपर्टी के बदले लोन या सिक्योरिटीज के बदले लोन. सिक्योरिटीज के बदले लोन (ये असल में सिक्योर्ड लोन होते हैं) उनमें से एक सेगमेंट जिसमें पिछले कुछ सालों में खासकर COVID-19 महामारी के बाद काफी तेजी आई है. वो है ‘म्यूचुअल फंड के बदले लोन (LAMF). म्यूचुअल फंड में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ने (पैसे कमाने की कोशिश में) के साथ-साथ LAMF भी बढ़े हैं. आज, सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि कई फिनटेक प्लेटफॉर्म भी जो लोन देते हैं वो म्यूचुअल फंड के बदले लोन दे रहे हैं.
म्यूचुअल फंड के बदले लोन हुआ आसान
RBI ने 2021 में अकाउंट एग्रीगेटर (AA) फ्रेमवर्क पेश किया था. जिससे बैंकों, लोन देने वाली संस्थाओं और म्यूचुअल फंड के बीच सुरक्षित, सहमति के आधार पर फाइनेंशियल डेटा शेयर करना आसान हो गया है. इससे म्यूचुअल फंड के बदले लोन देना आसान हो गया है. बैंकों और दूसरी लोन देने वाली संस्थाओं ने इन लोन को अपने ऐप और वेबसाइट में इंटीग्रेट कर लिया है.
लोन लेने के लिए क्या करना होगा?
एक उधार लेने वाले के तौर पर आपको बस इंटरनेट कनेक्शन वाला स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप चाहिए और आप अपने घर, ऑफिस, कैफे या जहां भी आप हैं. आराम से बैठकर इन लोन का फायदा उठा सकते हैं. डेटा से पता चलता है कि सिक्योर्ड लोन सेगमेंट (जिसमें आपकी कीमती संपत्ति या निवेश को बैंक या लोन देने वाली संस्था कोलैटरल के तौर पर इस्तेमाल करती है) में गोल्ड लोन के बाद म्यूचुअल फंड के बदले लोन का मार्केट सबसे तेजी से बढ़ रहा है.
क्या हैं इस लोन के फायदे?
म्यूचुअल फंड के बदले लोन युवा उधार लेने वालों के बीच लोकप्रिय हो गया है. इसके अलावा, म्यूचुअल फंड बेचने पर टैक्स लगता है (शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स या लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स) जबकि लोन लेने पर कोई टैक्स नहीं लगता. आमतौर पर आप इन्वेस्टमेंट की वैल्यू का 50-80% लोन के तौर पर ले सकते हैं (इक्विटी फंड के मामले में अधिकतम 20 लाख रुपये और डेट फंड के लिए 1 करोड़ रुपये तक). प्रोसेसिंग फीस देते हैं और बैंक या लेंडिंग संस्थान के आधार पर 10-12.5% प्रति वर्ष की दर से ब्याज देते हैं.
पर्सनल लोन की तुलना में कम होती है ब्याज दर
म्यूचुअल फंड पर लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन (जो एक अनसिक्योर्ड लोन है) की तुलना में बहुत कम होती है. साथ ही, ब्याज केवल लोन की इस्तेमाल की गई रकम पर लिया जाता है. जिससे आपको यानी कर्ज लेने वाले को इस्तेमाल न किए गए हिस्से पर बेवजह ब्याज देने से बचाया जा सकता है. इसके अलावा, दूसरे सिक्योर्ड लोन की तरह आपको रीपेमेंट में फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है. कोई मासिक किस्त (EMI) नहीं होती है.आप अपनी रीपेमेंट की रकम खुद तय करते हैं.
म्यूचुअल फंड पर लोन लेते समय आपको इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
इसे जरूरत पड़ने पर ही लोन समझें. ध्यान रखें कि आप उधार लिए गए पैसे पर ब्याज दे रहे हैं. इसलिए, म्यूचुअल फंड पर लोन तभी लें जब आपको फंड की बहुत अधिक जरूरत हो. फाइनेंशियल जरूरत का ध्यान से एनालिसिस करें और लोन का इस्तेमाल प्रोडक्टिव कामों (जैसे शिक्षा फीस या होम लोन डाउनपेमेंट) या कर्ज चुकाने (जिसमें आप ज़्यादा ब्याज वाले क्रेडिट कार्ड कर्ज चुका रहे हैं) के लिए करें. न कि लाइफस्टाइल की जरूरतों के लिए.
उधार लेने से बचें
जब मार्केट अपने टॉप पर हों तो उधार लेने से बचें. हालांकि ऐसा करने से आपको लोन के तौर पर अधिक रकम मिल सकती है. लेकिन दूसरी तरफ अगर एसेट की कीमतें गिरती हैं. तो आपको दबाव का सामना करना पड़ेगा.
ग्लोबल तनाव, ट्रेड वॉर और मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितताओं वाले मौजूदा माहौल में म्यूचुअल फंड पर लोन लेना या इक्विटी बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना महंगा साबित हो सकता है. इक्विटी म्यूचुअल फंड, खासकर मिड और स्मॉल कैप फंड में करेक्शन के मामले में लार्ज कैप फंड की तुलना में अधिक गिरावट देखी जा सकती है. तो, अगर आप अभी म्यूचुअल फंड के बदले लोन ले रहे हैं और आने वाले महीनों में उनकी मार्केट-लिंक्ड वैल्यू गिर जाती है, तो आपको मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ सकता है. यानी आपसे मार्जिन मनी देने या कोलैटरल के तौर पर और सिक्योरिटी देने के लिए कहा जा सकता है. जिससे आपकी दौलत और सेहत पर बोझ पड़ेगा.


