China Clone Hybrid Rice: चीन ने कृषि के क्षेत्र में क बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन के वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे दुनिया भर की खेती की तकनीक बदल जाएगी। दरअसल चीन के वैज्ञानिकों ने ‘क्लोन हाइब्रिड राइस’ विकसित किया है। इस संबंध में कहा जा रहा है कि इसकी विशेषता को अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी।

अब इस पर दुनिया भर से आ रही प्रतिक्रिया में कहा जा रहा है कि अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो किसानों को हर साल महंगे हाइब्रिड बीज खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को भी बल मिलेगा।
क्या है क्लोन हाइब्रिड राइस?
सामान्य हाइब्रिड धान की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसकी अधिक उपज केवल एक पीढ़ी तक ही सीमित रहती है। यही वजह है कि हर साल नए बीज खरीदने पड़ते है।
चीनी वैज्ञानिकों ने जिस तकनीक को विकसित किया है, उसके तहत हाइब्रिड धान अपने ही जैसे बीज तैयार करता है, इसका मतलब है कि अगली फसल में भी इसकी हाई क्वालिटी बनी रहेगी। इसे क्लोनल सीड प्रोपगेशन कहा जा रहा है। इसके लिए रिसर्चर ने HUAXU नामक जीन की मदद से लगभग 100 फीसदी क्लोनिंग की है।
इस रिसर्च से किसानों को क्या फायदा
आविष्कार एक ओर और व्यवसायिक दृष्टिकोण से उसकी सफलता दूसरी ओर है। अगर ऐसा हो जाता है कि प्रत्येक वर्ष खरीदे जीने वाले हाइब्रिड बीज की आवश्यकता कम हो जाएगी या फिर समाप्त हो जाएगी। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। साथ ही में भी कमी आने की संभावना है। छोटे किसानों को भी हाई क्वालिटी के बीज कम दाम में उपलब्ध हो पाएंगे। कम लागत और अधिक उपज से किसानों की आय बढ़ सकती है। विकासशील देशों में खाद्य उत्पादन बढ़ाने में की क्षमता विकसित होगी।
उपभोक्ताओं का क्या लाभ
विशेषज्ञ मानते है कि यदि बड़े स्तर पर उत्पादन बढ़ता है, तो बाजार में चावल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। कीमत कम होने की संभावना है। हालांकि, स्वाद, पर इस तकनीक का कोई नकारात्मक प्रभाव अब तक साबित नहीं हुआ है।
चुनौतियां
- अलगअलग देशों में नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता होगी।
- विभिन्न जलवायु और मिट्टी में इसका असर कैसा होगा, इसकी सफलता का परीक्षण होना बाकी है।
- लॉन्ग टर्म में Biodiversity पर इसके प्रभाव का क्या असर होगा।
- बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती में इसे अपनाने से पहले कई वर्षों तक फील्ड ट्रायल किया जाना चाहिए।
इस नई खोज का भारत पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े धान उत्पादक देशों में से एक है और यहां हाइब्रिड धान का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। यदि भविष्य में यह तकनीक सफल होती है, तो भारत भी इसे अपना सकता है। हालांकि फिलहाल यह तकनीक चीन के रिसर्च से व्यावसायिक विस्तार की ओर बढ़ रही है।