E20 Fuel Dissatisfaction Among Vehicle Owners : भारत में युवाओं के जोश ने लोगों को अपने असंतोष का जाहिर करने का जरिया दिया है और हालिया स्टूडेंट प्रोटेस्ट के जो भी नतीजे आए, उसके बाद लोग अब सरकार के प्रति अपनी नाराजगी को सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक जाहिर करने लगे हैं।

मौजूदा समय में एग्जाम पेपर लीक के साथ ही E20 फ्यूल को लेकर भी लोगों में काफी ज्यादा असंतोष और अनिश्चितता हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि आने वाले समय में लोग फ्यूल ऑप्शंस और उनके सॉल्यूशन की मांगों को लेकर सड़कों पर उतर सकते हैं। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि टैक्सी यूनियनों ने ई20 पेट्रोल पॉलिसी और अन्य ट्रांसपोर्ट रूल्स के विरोध में 4 अगस्त 2026 को संसद तक पीसफुल मार्च निकालने का ऐलान किया है।
तेल संकट से लेकर इथेनॉल विवाद तक…
सबसे पहले तो आपको इस पूरे वाकये के बारे में शुरू से बताते हैं। इस साल फरवरीमार्च में जब ईरान की इस्राइल और अमेरिका से जंग शुरू हुई, तभी से ग्लोबल ऑयल क्राइसिस की शुरुआत हुई और फिर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने के बाद तो हालात और ज्यादा बदतर हो गए। दुनियाभर में पेट्रोलडीजल के दाम बढ़ने लगे और भारत में फ्यूल्स के दाम आसमान छूने लगे।
तेल संकट के समाधान के रूप में सरकार ने जहां एक तरफ लोगों से तेल बचाने की अपील की और तेल के दाम में बढ़ोतरी की घोषणा की, वहीं पेट्रोल में इथेनॉल की मौजूदा 20 फीसदी से ज्यादा मात्रा बढ़ाने के प्रावधानों पर भी बात शुरू की।
सरकार ने जैसे ही ई20 से आगे की बात, यानी ई25 और ई30 की संभावनाओं की बात की, लोगों ने इसका विरोध किया और तर्क दिया कि एक तरफ तो ई20 से ही उनकी कारों का माइलेज घट गया है और 2023 से पहले की कारों में दिक्कतें आने लगी हैं, क्योंकि वह ई20 कंपैटिबल नहीं हैं।
सरकार ने लोगों के दावों को झुठलाते हुए इसे प्रोपगैंडा कहा और दावा किया कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। लेकिन सरकारी दावों से विपरीत काफी संख्या में लोग कहने लगे कि उनपर जबरदस्ती ई20 पेट्रोल थोपा गया और इससे गाड़ियों को नुकसान हो रहा है।
एक महीने तक चले स्टूडेंट प्रोटेस्ट में ई20 पेट्रोल का मुद्दा गुम रहा, लेकिन अब यह फिर से सुलगने लगा है और यह आम लोगों के साथ ही राजनीतिक दलों के लिए भी विरोध का एक जरिया बनने की ओर है और सबके निशाने पर नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी जैसे केंद्रीय मंत्री हैं।
लोगों की मांगें क्या हैं?
आपको बता दें कि ई20 पेट्रोल को लेकर लोगों में अंसतोष निश्चित तौर पर है और लोग अपनी बातें भी सोशल मीडिया और अन्य प्लैटफॉर्म के माध्यम से रखते हुए कुछ मांगें भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक तो फ्यूल स्टेशन में E10 पेट्रोल का विकल्प होना चाहिए, जो 2023 से पहले के वाहनों के लिए सही रहे।
इसके साथ ही ई20 पेट्रोल की कीमतें घटनी चाहिए और आखिर में जीरो पर्सेंट इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के दाम भी कम होने चाहिए, ताकि लोगों तक इसकी पहुंच सुलभ हो। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आने वाले समय में इसपर सरकार क्या करती है और जनता क्या अपनी परेशानियों को सड़कों पर लाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।