खामोशी से बदला गेम! भीम ऐप पर 10 गुना बढ़े UPI ट्रांजैक्शन, जानिए क्या हैं नए प्लान्स

खामोशी से बदला गेम! भीम ऐप पर 10 गुना बढ़े UPI ट्रांजैक्शन, जानिए क्या हैं नए प्लान्स

नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के BHIM ऐप में जबरदस्त वापसी हुई है. पिछले दो सालों में इसके मंथली UPI ट्रांज़ैक्शन लगभग दस गुना बढ़ गए हैं, साथ ही यह प्लेटफॉर्म पेमेंट के अलावा दूसरी सेवाओं में भी विस्तार करने की तैयारी कर रहा है. NPCI के डेटा के अनुसार, BHIM ने जून 2024 में 23 मिलियन ट्रांज़ैक्शन किए थे, जो जून 2026 में बढ़कर 224 मिलियन हो गए. इस दौरान ट्रांजैक्शन की वैल्यू भी तीन गुना से ज्यादा बढ़कर 7,966 करोड़ रुपए से 25,613 करोड़ रुपए हो गई.

खामोशी से बदला गेम! भीम ऐप पर 10 गुना बढ़े UPI ट्रांजैक्शन, जानिए क्या हैं नए प्लान्स

यह ग्रोथ भारत के शुरुआती UPI ऐप्स में से एक के लिए एक बड़ा बदलाव है, जिसने PhonePe और Google Pay के देश के प्रमुख पेमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर उभरने के बाद तेजी से अपनी पकड़ खो दी थी. इतनी बढ़ोतरी के बावजूद BHIM की हिस्सेदारी अभी भी कम है. जून में इसने कुल UPI ट्रांजैक्शन का लगभग 1 प्रतिशत हिस्सा संभाला, जबकि PhonePe और Google Pay का संयुक्त रूप से बाज़ार के लगभग 79 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा था.

कॉर्पोरेट रीसेट

BHIM की वापसी तब शुरू हुई जब NPCI ने 2024 में इस ऐप को एक अलग सब्सिडियरी बना दिया और इसे एक स्वतंत्र काम करने का अधिकार और मुनाफा कमाने वाला बिजनेस स्ट्रक्चर दिया. रीस्ट्रक्चरिंग के बाद NPCI ने NPCI BHIM सर्विसेज लिमिटेड में 300 करोड़ रुपए का निवेश किया. इसके बाद BHIM ने यूजर्स को जोड़ने के लिए कैशबैक इंसेंटिव बढ़ाए और अपने इंटरफेस और पेमेंट प्रोसेस में बड़े बदलाव किए.

ऐप ने “भारत के अपने पेमेंट ऐप” के तौर पर अपनी पहचान बनाने पर भी जोर दिया है, ताकि यह PhonePe और Google Pay से अलग दिख सके, जो अमेरिकी कंपनियों के स्वामित्व वाले हैं. हालांकि, इसकी हालिया ग्रोथ कई सालों तक बाजार में हिस्सेदारी घटने के बाद आई है. 2017 की पहली छमाही में UPI ट्रांजैक्शन में BHIM की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत थी, लेकिन उसी साल अक्टूबर तक यह घटकर 25 प्रतिशत रह गई. 2018 के मध्य तक यह और घटकर लगभग 6 प्रतिशत और 2018 के अंत तक 4 प्रतिशत हो गई.

पेमेंट से फाइनेंशियल सर्विसेज तक

BHIM का अगला फेज अपने बढ़ते पेमेंट बेस के आसपास एक बड़ा फाइनेंशियलसर्विसेज बिजनेस बनाना होगा. कंपनी ने मनी कंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि सब्सिडियरी का प्लान डिजिटल गोल्ड, क्रेडिट और क्रेडिटकार्ड प्रोडक्ट्स में उतरने का है, जैसेजैसे यह आगे बढ़ेगी. यह बैंकों के साथ मिलकर अपने प्लगइन को उनके UPI ऐप्स में इंटीग्रेट करने पर भी काम कर रही है.

केनरा बैंक हाल ही में इस फीचर को एक्टिवेट करने वाले पहले लेंडर्स में से एक बन गया है. BHIM की मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO ललिता नटराज ने एमसी की रिपोर्ट में कहा कि हम पेमेंट के बड़े और कम सेवा वाले क्षेत्रों, जैसे सरकारी पेमेंट, DBT और स्वयंसहायता समूहों में अपने काम का विस्तार कर रहे हैं, जहां डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल अभी भी कम है.

यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि BHIM की ग्रोथ अभी तक एक मुनाफे वाले बिनेस में नहीं बदल पाई है. जहां इसकी मूल कंपनी NPCI एक नॉनप्रॉफिट ऑर्गनाइेशन के तौर पर काम करती है, वहीं इसकी सब्सिडियरी BHIM का मकसद कमर्शियल है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। NPCI BHIM सर्विसे ने वित्त वर्ष 2025 में 4 करोड़ रुपए का रेवेन्यू और 68 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज किया. इसके वित्त वर्ष 2026 के फाइनेंशियल नतीजे अभी पब्लिक नहीं हुए हैं.

WhatsApp Pay तेजी से आगे बढ़ रहा है

BHIM अकेला छोटा UPI ऐप नहीं है जो तेजी से आगे बढ़ रहा है. WhatsApp Pay ने जून 2026 में 150 मिलियन ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जो जून 2024 में दर्ज 37 मिलियन ट्रांज़ैक्शन से चार गुना ज्यादा हैं. इस दौरान इसका वॉल्यूम मार्केट शेयर 0.27 फीसदी से बढ़कर लगभग 0.7 फीसदी हो गया. इस ग्रोथ की वजह से WhatsApp ने CRED को पीछे छोड़ दिया और जून में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के हिसाब से आठवां सबसे बड़ा UPI ऐप बन गया.

दूसरे कॉम्पिटिटर और भी तेजी से विस्तार कर रहे हैं. सचिन बंसल सपोर्टिड Navi ने चौथे सबसे बड़े UPI ऐप के तौर पर अपनी स्थिति मज़बूत कर ली है, जबकि Flipkart ग्रुप के super.money ने भी तेजी से अपनी जगह बनाई है.BHIM में दस गुना बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि सालों की गिरावट के बाद ऐप को नई रफ़्तार मिली है. इसकी बड़ी चुनौती इस रफ़्तार को आदत में बदलने, टिकाऊ रेवेन्यू हासिल करने और UPI के स्थापित मार्केट लीडर्स को कड़ी टक्कर देने की होगी.

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