Parliament Monsoon Session: अखिलेश का सरकार पर हमला, बोले वादे नहीं, सिर्फ जुमले मिलते हैं, कांग्रेस ने पूछा छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?

Parliament Monsoon Session: अखिलेश का सरकार पर हमला, बोले वादे नहीं, सिर्फ जुमले मिलते हैं, कांग्रेस ने पूछा छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?

Parliament Monsoon Session NEET Paper Leak Bill: संसद के मानसून सत्र में आज पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर अहम चर्चा होगी। विपक्ष की सहमति के बाद लोकसभा स्पीकर ने इस पर शुरुआती तौर पर 6 घंटे की चर्चा तय की है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है। चर्चा दोपहर 12 बजे के आसपास शुरू होने की संभावना है।

Parliament Monsoon Session: अखिलेश का सरकार पर हमला, बोले वादे नहीं, सिर्फ जुमले मिलते हैं, कांग्रेस ने पूछा छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?

सोमवार को केंद्र सरकार ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल, 2026’ लोकसभा में पेश किया। इस संशोधन के जरिए 2024 के मौजूदा कानून को और सख्त बनाया जाएगा। प्रस्तावित बदलावों में पेपर लीक के आरोपियों के लिए कड़ी सजा, भारी जुर्माना और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की अनुमति शामिल है। इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई की जाएगी।

दयानिधि मारन ने NEET और ‘वन इंडिया, वन एग्जाम’ नीति पर उठाए सवाल

लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान DMK सांसद दयानिधि मारन ने NEET परीक्षा और ‘वन इंडिया, वन एग्जाम’ की नीति पर सवाल उठाए। मारन ने कहा कि देश के कई अनुभवी डॉक्टरों ने कभी NEET परीक्षा नहीं दी, फिर भी वे दुनिया के बेहतरीन चिकित्सकों में गिने जाते हैं। उन्होंने पूछा कि NEET लागू होने के बाद ऐसा कौनसा बड़ा बदलाव आया है, जिससे यह व्यवस्था पहले से बेहतर साबित हुई हो।

उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा भी पहले पेपर लीक की वजह से प्रभावित हो चुकी है, इसलिए केवल एक केंद्रीय परीक्षा लागू कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। DMK सांसद ने केंद्र सरकार से ‘वन इंडिया, वन एग्जाम’ की नीति पर पुनर्विचार करने की अपील करते हुए कहा, “हम भारत का हिस्सा हैं, लेकिन हमारी विविधता और राज्यों की अपनी व्यवस्था का भी सम्मान होना चाहिए। अपने भाषण के दौरान मारन ने केंद्रीय मंत्री का यह कहते हुए धन्यवाद भी दिया कि विधेयक हिंदी या संस्कृत के बजाय अंग्रेजी में पेश किया गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।

बांसुरी स्वराज बोलीं पेपर लीक पर सख्ती के लिए यह बिल समय की जरूरत

लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने बिल का समर्थन करते हुए इसे मौजूदा समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि “यह विधेयक सिर्फ जरूरी नहीं, बल्कि आज की परिस्थितियों में बेहद अहम है। परीक्षा माफिया अब संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहा है, इसलिए उससे निपटने के लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है। बांसुरी स्वराज ने कहा कि नया बिल जांच के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याओं को दूर करेगा। इसके तहत केंद्र सरकार विशेष टास्क फोर्स का गठन कर सकेगी, जिससे पेपर लीक के मामलों की जांच अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जबकि मुकदमे का ट्रायल तीन महीने के अंदर पूरा कर फैसला सुनाने का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना था कि इससे दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होगी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।

कांग्रेस का सरकार पर निशाना, गोगोई ने पूछा NTA के डीजी बदले, चेयरमैन क्यों नहीं?

लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था सुधारने और पेपर माफिया, प्रिंटिंग सेंटर व कोचिंग माफिया पर कार्रवाई की रणनीति बनाने पर ध्यान देना चाहिए था। गोगोई ने कहा, पहली कैबिनेट बैठक में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और पेपर लीक रोकने पर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन प्रधानमंत्री इंस्टाग्राम पर ज्यादा ध्यान देने की बात करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार बारबार हाई पावर कमेटी की बात करती है, लेकिन दो साल पहले गठित राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ, इसका जवाब भी देश को मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि NTA के महानिदेशक को तो बदल दिया गया, लेकिन चेयरमैन को क्यों नहीं बदला गया?

2024 का कानून भी पेपर लीक नहीं रोक पाया

गोगोई ने दावा किया कि 2024 में लागू किया गया कानून अपने उद्देश्य में सफल नहीं रहा, क्योंकि इसके बावजूद 2026 में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि सरकार जिस मंशा से नया संशोधन बिल ला रही है, वह भी तब तक प्रभावी नहीं होगा, जब तक व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं किए जाते। कांग्रेस सांसद ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 2024 में भी उन्होंने पेपर लीक से इनकार किया था और इस बार भी उनका रवैया वही रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद के दौरान 21 छात्रों ने आत्महत्या की, फिर भी सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई। गोगोई ने यह भी कहा कि प्रधान के इस्तीफे के बाद जब वे संसद पहुंचे तो उनका जिस तरह स्वागत किया गया, वह उचित नहीं था।

कांग्रेस का सरकार पर हमला

लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2024 में भी सरकार इसी तरह का कानून लेकर आई थी और उसे ऐतिहासिक कदम बताया था, लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं। गोगोई ने कहा, “मैं जानना चाहता हूं कि 2026 के नीट पेपर लीक मामले की जांच आखिर किस स्थिति में है। इससे पता चलेगा कि सरकार दो साल पहले हुए भ्रष्टाचार को लेकर कितनी गंभीर है। उन्होंने दावा किया कि 2024 के पेपर लीक मामले में नामजद 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। गोगोई ने यह भी कहा कि जिस आरोपी को मामले का मास्टरमाइंड बताया गया था, वह करीब 11 महीने तक फरार रहा। उसकी गिरफ्तारी 2025 में हुई, लेकिन बाद में उसे भी जमानत मिल गई।

लोकसभा की कार्यवाही फिर शुरू, राज्यसभा पूरे दिन के लिए स्थगित

संसद में दोपहर 2 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हो गई। वहीं, लगातार हंगामे के बीच राज्यसभा की कार्यवाही बुधवार, 29 जुलाई तक स्थगित कर दी गई है। अब राज्यसभा की अगली बैठक 29 जुलाई को सुबह 11 बजे होगी।

राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा में नीट पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। सुबह 11 बजे विपक्षी सांसदों ने दिल्ली में नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। वाम दलों समेत कई विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर इस मामले पर बयान देने की मांग की।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन लगातार हंगामे के कारण उन्हें बोलने का अवसर नहीं मिल सका। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने शून्यकाल की कार्यवाही शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष का शोरशराबा जारी रहने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। गौरतलब है कि 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र के बाद से नीट पेपर लीक का मुद्दा राज्यसभा में लगातार विपक्ष और सरकार के बीच टकराव की प्रमुख वजह बना हुआ है।

NDA की बैठक में पहली बार पहुंचे TMC से अलग हुए सांसद

संसद भवन में आयोजित NDA संसदीय दल की बैठक में इस बार एक नया राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। पहली बार नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया के सांसदों को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। ये सभी सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस में थे और बाद में अलग होकर NCPI में शामिल हुए। बैठक में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष, शताब्दी रॉय, शर्मिला सरकार और मिताली बाग सहित अन्य सांसद मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों को संबोधित किया। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के अन्य सांसद भी शामिल हुए।

संसद पहुंचे पीएम मोदी, शुरू हुई ‘मंगल मिलन’ बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार सुबह संसद पहुंचे और NDA की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक में हिस्सा लिया। उनके साथ संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। ‘मंगल मिलन’ बैठक में संसद के मौजूदा सत्र की रणनीति, सरकार के प्रमुख विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की जाती है। बैठक संसद की पार्लियामेंट्री लाइब्रेरी बिल्डिंग में आयोजित की गई। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह हुई इसी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने NEET पेपर लीक को राष्ट्रीय चिंता का विषय बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।

मौजूदा पेपर लीक कानून की प्रमुख बातें

जून 2024 तक देश में पेपर लीक रोकने के लिए कोई एक केंद्रीय कानून नहीं था। ऐसे मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई होती थी। कई राज्यों ने अपने स्तर पर नकलविरोधी कानून बनाए। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग कानून का भी इस्तेमाल किया गया। NEETUG और UGC परीक्षाओं में गड़बड़ी के बाद केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 को सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम लागू किया।

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इस कानून के तहत पेपर लीक, नकल कराने, OMR शीट की अवैध खरीदफरोख्त, फर्जी परीक्षा वेबसाइट बनाने और परीक्षकों को धमकाने जैसे अपराध गैरजमानती हैं। मौजूदा कानून में पेपर लीक जैसे अपराधों पर 3 से 5 साल की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने, जबकि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के जिम्मेदार अधिकारियों की संलिप्तता पाए जाने पर 3 से 10 साल की जेल और ₹1 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान है। नए संशोधन के जरिए इन प्रावधानों को और प्रभावी बनाने की तैयारी है।

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