‘जज साहिबा! कानून आपके घर का नहीं है…’, 69 साल के बुजुर्ग को जेल भेजने वाली महिला जज को हाई कोर्ट ने लताड़ा, FIR पर स्टे

‘जज साहिबा! कानून आपके घर का नहीं है…’, 69 साल के बुजुर्ग को जेल भेजने वाली महिला जज को हाई कोर्ट ने लताड़ा, FIR पर स्टे

Karnataka News: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मालूर न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की न्यायाधीश गायत्री के आचरण की तीखी निंदा की है. निजी विवाद में अपने पद और संवैधानिक प्रभाव का कथित दुरुपयोग करते हुए एक बाइक सवार युवक, उसकी मां और 69 वर्षीय दादा के खिलाफ पुलिस पर दबाव डालकर FIR दर्ज कराने के मामले में हाई कोर्ट ने जज को कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने पीड़ित परिवार के खिलाफ दर्ज मामले की आगे की कार्रवाईपर अंतरिम रोक भी लगा दी है.

‘जज साहिबा! कानून आपके घर का नहीं है…’, 69 साल के बुजुर्ग को जेल भेजने वाली महिला जज को हाई कोर्ट ने लताड़ा, FIR पर स्टे

मालूर जेएमएफसी जज गायत्री अपने पति के साथ निजी इनोवा कार में यात्रा कर रही थीं. इसी दौरान 24 वर्षीय दोपहिया वाहन चालक के.एम. विनय ने कथित तौर पर कार को रोककर या पास से गुजरते हुए उन्हें गाड़ी धीरे चलाने को कहा. इस बात से नाराज होकर जज और उनके पति ने बाइक सवार का पीछा किया और उसके घर तक पहुंच गए, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई. पूरे घटनाक्रम का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें बहस और विवाद साफ नजर आ रहा था.

पद का दुरुपयोग और 69 वर्षीय बुजुर्ग की गिरफ्तारी

जज गायत्री की शिकायत पर मालूर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए के.एम. विनय , उनकी मां कविता और उनके 69 वर्षीय दादा वेंकटेश को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें बाद में जमानत पर रिहा किया गया. राज्य के विशेष लोक अभियोजक बी.एन. जगदीश ने अदालत के समक्ष फुटेज पेश करते हुए माना कि पुलिस ने जज के प्रभाव में आकर 70 साल के करीब पहुंच रहे बुजुर्ग को भी गिरफ्तार कर लिया था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके अलावा जज ने खुद शिकायतकर्ता होते हुए सोशल मीडिया से फुटेज हटाने के आदेश भी दिए थे.

“न्यायाधीश का आचरण अनुकरणीय होना चाहिए”

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाली एकल पीठ ने बेहद कड़े शब्दों में जज के व्यवहार की आलोचना की. पीठ ने स्पष्ट कहा कि केवल न्यायाधीश पद पर होने मात्र से किसी को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह आम नागरिकों के साथ ऐसा अनुचित व्यवहार करे. हाई कोर्ट ने कहा कि एक न्यायाधीश का आचरण अदालत के कमरे के अंदर और बाहर, दोनों जगह जनता में विश्वास जगाने वाला होना चाहिए. जज गायत्री का यह कृत्य न्यायाधीश पद की गरिमा के अशोभनीय है. पीठ ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत देते हुए मालूर पुलिस द्वारा दर्ज FIR और आगे की पूरी कानूनी कार्रवाई पर अंतरिम स्टे लगा दिया है.

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