NSE ने 1491 करोड़ देकर धोए दामन पर लगे काले दाग, IPO का रास्ता हुआ साफ

NSE ने 1491 करोड़ देकर धोए दामन पर लगे काले दाग, IPO का रास्ता हुआ साफ

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज अपने लंबे समय से रुके हुए स्टॉक मार्केट डेब्यू के और करीब पहुंच गया. ऐसा तब हुआ जब भारत के मार्केट रेगुलेटर ने एक्सचेंज के खिलाफ सभी पेंडिंग मामलों को सुलझाने पर सहमति जताई यह अब तक किसी भी संस्था द्वारा किया गया सबसे बड़ा सेटलमेंट है. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने NSE से कहा कि वह 1,491.2 करोड़ रुपए में सभी पेंडिंग मामलों को सुलझा लेगा, जिसमें कोलोकेशन और डार्क फाइबर के मामले भी शामिल हैं, जो सालों से एक्सचेंज के लिए परेशानी का सबब बने हुए थे. इस सेटलमेंट से भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज और उसके इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के बीच खड़ी आखिरी बड़ी रेगुलेटरी बाधा दूर हो गई है. कानूनी और रेगुलेटरी पेचीदगियों के कारण यह IPO बारबार टल रहा था.

NSE ने 1491 करोड़ देकर धोए दामन पर लगे काले दाग, IPO का रास्ता हुआ साफ

ये मामले होंगे सेटल

NSE ने कहा कि Sebi ने 30 जुलाई, 2026 के ईमेल के जरिए सेटलमेंट की शर्तों को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है और 714.74 करोड़ रुपए की मांग की है. इसके अलावा, NSE ने Sebi के पास 776.47 करोड़ रुपए जमा किए थे, जिसे 1,491.211 करोड़ रुपए की सेटलमेंट राशि में एडजस्ट किया जाएगा. कोलोकेशन का मामला जिसमें कुछ ब्रोकर्स पर NSE के ट्रेडिंग सर्वर तक गलत तरीके से एक्सेस पाने का आरोप था 2015 से एक्सचेंज के लिए सिरदर्द बना हुआ था और तब से इसे जांच, अपील और ट्रिब्यूनल की लड़ाइयों से गुजरना पड़ रहा था.

सुप्रीम कोर्ट वापस होंगे सभी मामले

गुरुवार के सेटलमेंट ने इस मामले और कुछ चुनिंदा ट्रेडिंग फर्मों को नेटवर्क का खास एक्सेस देने से जुड़े डार्क फाइबर के अलग मामले को भी खत्म कर दिया है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। NSE ने कहा कि 1,491.211 करोड़ रुपए की सेटलमेंट राशि का फाइनेंशियल असर 31 मार्च, 2026 को खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर में पहले ही दिखाया जा चुका है. हालांकि, सेटलमेंट के लिए कैश का आउटफ्लो 714.74 करोड़ रुपए होगा. एक बार जब Sebi सेटलमेंट का आदेश जारी कर देगा, तो सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग मामले वापस ले लिए जाएंगे. NSE इस साल 26,000 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाने की योजना बना रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *