बहन की जिद और 14 साल का इंतजार… आखिर प्रबल अग्रवाल को मिला इंसाफ, हत्याकांड के 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा

बहन की जिद और 14 साल का इंतजार… आखिर प्रबल अग्रवाल को मिला इंसाफ, हत्याकांड के 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा

Bijnor News: बिजनौर जिले के सबसे चर्चित मामलों में से एक ‘प्रबल अग्रवाल हत्याकांड’ में आखिरकार 14 साल के लंबे इंतजार के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिल ही गया. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/ संख्या7 के जज शहजाद अली ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मामले के सभी सातों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही कोर्ट ने सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है. कोर्ट का यह फैसला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि दोषी ठहराए गए लोग शहर के रसूखदार और रईस परिवारों से संबंध रखते हैं.

बहन की जिद और 14 साल का इंतजार… आखिर प्रबल अग्रवाल को मिला इंसाफ, हत्याकांड के 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा

इन 7 रसूखदारों को मिली सजा

कोर्ट ने जिन सात आरोपियों को अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाकर उम्रकैद की सजा सुनाई है, उनके नाम…

  • 1 संजय गुप्ता .
  • 2 विनय अग्रवाल .
  • 3 अपूर्व अग्रवाल .
  • 4 राहुल गुप्ता.
  • 5 आशीष अग्रवाल उर्फ आशू.
  • 6 निखिल अग्रवाल.
  • 7 अनुज गुप्ता.

क्या था पूरा मामला?

यह खौफनाक वारदात 19 दिसंबर 2012 की रात को घटी थी. मोहल्ला जाटान निवासी आलोक अग्रवाल का बेटा प्रबल अग्रवाल बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित महाराजा अग्रसेन जयंती कार्यक्रम में शामिल होने गया था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, वहां शराब के नशे में धुत आरोपियों का प्रबल से किसी बात को लेकर विवाद हो गया. इसके बाद दोषियों ने मिलकर प्रबल की बेरहमी से पिटाई की.

पिटाई से जब प्रबल अधमरा हो गया तो दोषी उसे अपनी कार में डालकर अज्ञात स्थान पर ले गए. डॉक्टरों द्वारा उसे मृत घोषित किए जाने के बाद, साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से आरोपियों ने उसके शव को गंगा नहर में फेंक दिया था. घटना के करीब 25 दिन बाद 15 जनवरी 2013 को हस्तिनापुर के पास गंगा से प्रबल का शव बरामद हुआ था. इस हत्याकांड के बाद पूरे बिजनौर में कैंडल मार्च और उग्र प्रदर्शन हुए थे.

टूट गया परिवार, बहन ने अकेले लड़ी रसूखदारों से जंग

इस हत्याकांड ने हंसतेखेलते अग्रवाल परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया था. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बेटे की मौत के गम और गहरे सदमे के कारण घटना के महज 6 महीने बाद ही पिता आलोक अग्रवाल का निधन हो गया. इसके कुछ समय बाद मां भी चल बसीं. घर में अकेली बची प्रबल की बहन प्राची अग्रवाल ने इस विकट परिस्थिति में भी हार नहीं मानी. प्राची ने रसूखदार और बेहद धनवान दोषियों के खिलाफ अकेले कानूनी लड़ाई जारी रखी.

बताया जाता है कि दोषियों के रसूख और खौफ के कारण शुरुआत में बिजनौर का कोई वकील पीड़ित पक्ष का केस लड़ने को तैयार नहीं था. अंतत वरिष्ठ अधिवक्ता अहमद जकावत के सहयोग से प्राची ने इस जंग को मुकाम तक पहुंचाया. प्राची की गवाही इस केस को साबित करने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनी.

पुलिस की भूमिका पर कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष के वकील अहमद जकावत ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे कि पैसे और राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने शुरू से ही केस को बेहद कमजोर करने और दोषियों को बचाने का प्रयास किया था. अदालत ने मामले की जांच के दौरान हुई लापरवाही और अनियमितताओं को बेहद गंभीरता से लिया. साथ ही तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं.

न्याय की जीत

अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भावुक प्राची अग्रवाल ने कहा कि भाई के जाने का गम तो कभी कम नहीं हो सकता, लेकिन आज कोर्ट के इस फैसले से उनके मातापिता और भाई की आत्मा को शांति मिलेगी. आरोपियों से दो करोड़ रुपए लेकर समझौता करने का प्रलोभन भी दिया जा रहा था, लेकिन यह फैसला साबित करता है कि न्याय व्यवस्था में धन बल और रसूख की नहीं, बल्कि सत्य की जीत होती है.

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