अब जमीन की नहीं पानी की बारी तैरने वाले सोलर पैनल से आएगी बिजली, जानिए क्या है पीएम सूर्य सरोवर योजना

अब जमीन की नहीं पानी की बारी तैरने वाले सोलर पैनल से आएगी बिजली, जानिए क्या है पीएम सूर्य सरोवर योजना

Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana: हम सबने खाली मैदानों या घरों की छतों पर सोलर पैनल लगे देखे हैं. लेकिन अब बिजली पैदा करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है. केंद्र सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना’ को हरी झंडी दे दी है. सरकार ने इस योजना के लिए 5070 करोड़ रुपये का बजट रखा है.

अब जमीन की नहीं पानी की बारी तैरने वाले सोलर पैनल से आएगी बिजली, जानिए क्या है पीएम सूर्य सरोवर योजना

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब बिजली बनाने के लिए बड़ेबड़े खेतों या जमीनों की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि तालाबों और जलाशयों के पानी पर तैरने वाले सोलर पैनल लगाए जाएंगे. इससे ना सिर्फ हमारी कीमती जमीन बचेगी, बल्कि पावर ग्रिड मजबूत होने से आम लोगों को बिना रुकावट के बिजली भी मिलेगी.

पानी पर बनेगा बिजली घर, 5000 मेगावाट का है लक्ष्य

अभी हमारे देश में पानी पर तैरने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स से सिर्फ 700 मेगावाट के करीब बिजली बनती है. सरकार की इस नई योजना का लक्ष्य इस आंकड़े को बढ़ाकर सीधे 5000 मेगावाट तक ले जाना है. इसमें सबसे खास बात यह है कि इन प्रोजेक्ट्स के साथ बड़े बैटरी सिस्टम भी लगाए जाएंगे. इसका सीधा मतलब यह है कि अगर मौसम खराब है या सूरज की रोशनी नहीं है, तब भी इनमें कम से कम दो घंटे की बिजली स्टोर रहेगी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इससे घरों तक बिजली की सप्लाई रुकेगी नहीं. सरकार का प्लान है कि वित्तीय वर्ष 202627 से 203031 के बीच इन प्रोजेक्ट्स को पास करके जमीन पर उतार दिया जाए.

प्रोजेक्ट लगाने वालों को सरकार देगी करोड़ों की मदद

पानी पर सोलर पैनल लगाना कोई छोटा और आसान काम नहीं है. इसमें कंपनियों का काफी पैसा और रिस्क लगता है. इसलिए इस योजना को सफल बनाने के लिए सरकार अपनी तरफ से बड़ी आर्थिक मदद देने जा रही है. जो भी फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चालू हो जाएगा, उसे सरकार की तरफ से हर एक मेगावाट के लिए 1 करोड़ रुपये की सीधी मदद मिलेगी.

इसके अलावा, प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले कई तरह की जांच करनी होती है. जैसे पानी कितना गहरा है, वहां का पर्यावरण कैसा है और क्या वहां प्लांट लगाना सही रहेगा. इस तरह की तमाम शुरुआती जांचपड़ताल और तैयारियों के लिए भी सरकार हर प्रोजेक्ट को अलग से 50 लाख रुपये तक का फंड देगी.

आम लोगों और देश को क्याक्या होगा फायदा?

यह योजना किसी एक राज्य के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है. इसका असर कई मोर्चों पर देखने को मिलेगा.

  1. जमीन की बचत: पहले बड़े सोलर प्लांट लगाने के लिए काफी जमीन चाहिए होती थी. अब फैक्ट्रियों के बड़े तालाबों और जलाशयों का इस्तेमाल होने से जमीन के लिए होने वाला झगड़ा और मारामारी खत्म हो जाएगी.
  2. पर्यावरण को फायदा: यह योजना प्रदूषण कम करने में भी कारगर है. इससे हर साल लगभग 10 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा.
  3. रोजगार के नए मौके: इस योजना से देश में सोलर पैनल, सेल और पानी पर तैरने वाले सिस्टम बनाने का काम तेज होगा. इससे जुड़ी पूरी चेन में करीब 16,000 से 17,000 लोगों को फुलटाइम नौकरी मिलेगी.

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