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चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को बड़ा झटका! दिल्ली हाई कोर्ट ने सरेंडर की मोहलत बढ़ाने से किया इनकार

चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को बड़ा झटका! दिल्ली हाई कोर्ट ने सरेंडर की मोहलत बढ़ाने से किया इनकार

Rajpal Yadav Surrender Order: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के लिए चेक बाउंस मामला अब गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर को तगड़ा झटका देते हुए सरेंडर के लिए और वक्त देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, राजपाल यादव को बुधवार शाम 4 बजे तक सरेंडर करना था, जिसके बाद उन्हें जेल जाना होगा।

यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनाया। कोर्ट ने एक्टर की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने सरेंडर के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। जस्टिस ने साफ कहा कि पहले ही दो दिन की मोहलत दी जा चुकी थी और अब इसमें और कोई आधार नहीं बनता।

कोर्ट ने क्यों ठुकराई मोहलत की मांग?

राजपाल यादव की ओर से दलील दी गई थी कि उन्होंने 50 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया है और भुगतान के लिए एक हफ्ते का समय दिया जाए। हालांकि, कोर्ट इस तर्क से संतुष्ट नहीं हुआ। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बार-बार आश्वासन देने के बावजूद एक्टर ने भुगतान नहीं किया, जो कोर्ट के भरोसे के साथ खिलवाड़ है।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पहले भी राजपाल यादव को राहत दी गई थी, लेकिन उन्होंने समय रहते शर्तें पूरी नहीं कीं। ऐसे में अब और मोहलत देना न्यायोचित नहीं होगा।

बार-बार टूटा कोर्ट का भरोसा

हाई कोर्ट ने 2 फरवरी को ही स्पष्ट कर दिया था कि राजपाल यादव को 4 फरवरी तक सरेंडर करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक्टर ने कई मौकों पर कोर्ट को आश्वासन दिया, लेकिन हर बार भुगतान में नाकाम रहे। इसी वजह से कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

अब मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी को तय की गई है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि अब तक जो रकम जमा कराई गई है, वह शिकायतकर्ता कंपनी को जारी कर दी जाए।

क्या है पूरा चेक बाउंस मामला?

यह मामला साल 2010 का है, जब ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही और एक्टर भारी आर्थिक संकट में फंस गए।

कर्ज चुकाने के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने उनके खिलाफ धारा 138 के तहत केस दर्ज कराया। पहले उन्हें 6 महीने की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में समझौते के लिए रद्द कर दिया गया, लेकिन समझौता न होने के चलते अब कोर्ट ने सख्ती दिखाई है।

hi.quicksamachar@gmail.com

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