
पीलीभीत, अमृत विचार। शासन प्रशासन की सख्ती के बाद भी जिम्मेदारी की लेटलतीफी की आदत दूर नहीं हो सकी है। इसकी हक़ीक़त एक बार फिर उजागर हो गई। डीएम के औचक निरीक्षण में 10 अफसर और 60 कर्मचारी दफ्तर से गायब मिले। एक दिन का वेतन काटने के साथ ही जबाव तलब करते हुए चेतावनी दी गई है।
डीएम ज्ञानेन्द्र सिंह ने गुरुवार सुबह कलेक्ट्रेट और विकास भवन स्थित विभिन्न सरकारी कार्यालयों में औचक निरीक्षण किया, जिससे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सुबह करीब 10.20 बजे शुरू हुए निरीक्षण में 60 कर्मचारी और 10 अधिकारी बिना अनुमति के अनुपस्थित मिले। डीएम ने कलेक्ट्रेट, जिला पंचायत, निर्वाचन, समाज कल्याण, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, ट्रेजरी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डूडा, मत्स्य विभाग, जिला पंचायतराज अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण, जिला पूर्ति और पीओपीआरडी कार्यालयों की उपस्थिति पंजिका की जांच की।
निरीक्षण में कलेक्ट्रेट के 12, जिला पंचायत के 15, ट्रेजरी के सात, जिला पूर्ति कार्यालय के सात, जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय के पांच, मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय के तीन, निर्वाचन व पीओपीआरडी के दोदो और समाज कल्याण, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, डूडा, मत्स्य विभाग और दिव्यांगजन सशक्तीकरण कार्यालय का एकएक कर्मचारी अनुपस्थित मिला।
ये 10 अफसर भी मिले दफ्तर से गायब
केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अफसर भी दफ्तरों से नदारद मिले। उसमें जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी, अपर मुख्य विकास अधिकारी, सहायक निबंधक सहकारिता, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, अधिशासी अभियंता , सहायक अभियंता , पीडी डीआरडीए और जिला मत्स्य अधिकारी भी अनुपस्थित पाए गए।
सरकारी कार्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति और कार्य संस्कृति से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। सभी अनुपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए एक दिन का वेतन काटने और स्पष्टीकरण लेने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ज्ञानेंद्र सिंह, डीएम।
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