NEET UG Paper Leak: NEETUG पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक की शुरुआत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे तीन विषय विशेषज्ञों से हुई थी। आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने अपनी अधिकृत पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हुए परीक्षा के सवालों और उनके जवाबों की जानकारी बाहर पहुंचाई। इसके बाद यही सामग्री अलगअलग लोगों के जरिए कई शहरों तक पहुंची और आखिरकार छात्रों को उपलब्ध कराई गई।

CBI की चार्जशीट के मुताबिक, यह पूरा खेल सीधे परीक्षा का पूरा पेपर बाहर निकालने के बजाय सवालों का कंटेंट निकालकर उसे छात्रों तक पहुंचाने के तरीके से किया गया। जांच में फोरेंसिक सबूत, डिजिटल पेमेंट और नकदी बरामदगी का भी जिक्र किया गया है।
NTA के तीन विशेषज्ञों पर सवाल
चार्जशीट के अनुसार, पेपर की गोपनीय सामग्री के अनुवाद, दोबारा अनुवाद और प्रूफरीडिंग के दौरान कथित तौर पर लीक की शुरुआत हुई। इस मामले में तीन कॉन्ट्रैक्ट विशेषज्ञों के नाम सामने आए हैं।
मनीषा गुरुनाथ मांधरे बॉटनी और जूलॉजी
प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी केमिस्ट्री
मनीषा संजय हवलदार फिजिक्स
CBI के मुताबिक, अप्रैल 2026 में इन विशेषज्ञों ने परीक्षा के पूरे प्रश्नपत्र को लीक करने के बजाय उसके सवाल और उत्तर बाहर पहुंचाने का तरीका अपनाया।
घर पर बुलाकर छात्रों को बताए सवाल
जांच के मुताबिक, कुलकर्णी और मांधरे ने पुणे स्थित अपने घरों पर कथित तौर पर गुप्त रिवीजन सेशन आयोजित किए। इन बैठकों में चुनिंदा छात्रों को सवाल, उनके विकल्प और सही उत्तर बताए जाते थे। छात्र इन सवालों को अपनी नोटबुक में लिख लेते थे। वहीं, फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा हवलदार पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा के सवाल कुछ कोचिंग शिक्षकों तक पहुंचाए। इन सवालों को हाथ से लिखा गया और बाद में उनकी तस्वीरें खींचकर आगे भेजी गईं।
हाथ से लिखे नोट्स की तस्वीरें भेजी गईं
चार्जशीट के अनुसार, हवलदार ने फिजिक्स के सवाल पुणे के एपीएमए में पढ़ाने वाले शिक्षक तेजस हर्षदकुमार शाह को दिए। CBI का दावा है कि हवलदार के फोन में तेजस का नंबर एक खास नाम से सेव था। तेजस ने कथित तौर पर हाथ से लिखे गए सवालों की तस्वीरें खींचकर लातूर के रेणुकाई करियर सेंटर के निदेशक प्रोफेसर शिवराज मोतेगांवकर को भेजीं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके बदले हवलदार के पति के नाम पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन भुगतान किया गया।
लातूर में छात्रों को भी कराए गए सवाल याद
चार्जशीट में एक अन्य कड़ी पुणे के डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरुरे से जुड़ती है। CBI के मुताबिक, कुलकर्णी और मांधरे ने कथित तौर पर शिरुरे के साथ मिलकर चुनिंदा छात्रों तक सवाल पहुंचाए। आरोप है कि कुछ छात्रों को परीक्षा से पहले लातूर के सिद्धिविनायक अस्पताल बुलाया गया, जहां उन्हें लीक हुए सवाल और उनके जवाब याद कराए गए।
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महाराष्ट्र से जयपुर तक पहुंची लीक सामग्री
CBI के अनुसार, लीक हुए सवालों का नेटवर्क महाराष्ट्र से आगे भी फैला। जांच में नासिक के शुभम खैरनार और गुरुग्राम के यश यादव के नाम सामने आए हैं। चार्जशीट के मुताबिक, सवालों को PDF में तैयार कर टेलीग्राम के जरिए यादव तक भेजा गया। इसके बाद कथित तौर पर यह PDF जयपुर के मंगीलाल बिवाल उर्फ मंगीलाल खटीक को करीब 10 से 12 लाख रुपये में बेची गई। आरोप है कि मंगीलाल ने इस सामग्री को प्रिंट करवाकर अपने परिवार के उन सदस्यों, कोचिंग छात्रों और निजी ट्यूटरों तक पहुंचाया, जो परीक्षा से जुड़े थे।
फोरेंसिक जांच में नोटबुक और असली पेपर का मिलान
CBI ने चार्जशीट में फोरेंसिक जांच के नतीजों को भी अहम सबूत बताया है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और GEQD की हैंडराइटिंग जांच के मुताबिक, छापेमारी के दौरान बरामद छात्रों की नोटबुक में लिखे सवाल 3 मई को हुई NEETUG परीक्षा के वास्तविक प्रश्नों से मेल खाते पाए गए। जांच में कथित लेनदेन के डिजिटल सबूत भी मिले हैं। CBI के अनुसार, हवलदार के परिवार से जुड़े मोबाइल नंबर पर किए गए ऑनलाइन भुगतान की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा डॉक्टर शिरुरे के एक परिजन के पास से 5 लाख रुपये नकद बरामद किए जाने का भी चार्जशीट में उल्लेख है।
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CBI ने ऐसे जोड़ी पूरे नेटवर्क की कड़ियां
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, मामले में पेपर की गोपनीय जानकारी तक पहुंच रखने वाले लोगों से लेकर उसे छात्रों तक पहुंचाने और फिर दूसरे राज्यों में बेचने तक की कड़ियां सामने आई हैं। फोरेंसिक जांच, डिजिटल भुगतान, नोटबुक और नकदी बरामदगी को जांच का अहम हिस्सा बताया गया है। हालांकि, चार्जशीट में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
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