अमेरिका और भारत के बीच लंबे समय से प्रस्तावित ट्रेड डील पर नया संकट मंडराने लगा है. अमेरिकी सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने से जुड़ा एक बड़ा बिल पास कर दिया है. इस बिल के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है.

भारत और चीन उन देशों में शामिल हैं, जिन पर इस फैसले का सीधा असर पड़ सकता है. हालांकि, अभी यह कानून नहीं बना है. बिल को पहले हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी बाकी है. इसके बाद ही यह राष्ट्रपति के पास जाएगा.
भारत और चीन पर क्यों पड़ेगा असर?
इस बिल में अमेरिका के राष्ट्रपति को रूस से तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले दुनिया के पांच बड़े खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है. फिलहाल भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं. इसलिए नए कानून का असर इन देशों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, टैरिफ अपने आप लागू नहीं होगा. राष्ट्रपति को इसे लागू करने का अधिकार होगा और इसके लिए कुछ कानूनी और प्रशासनिक शर्तें भी होंगी. बिल में कुछ देशों के लिए छूट का प्रावधान भी है. अगर कोई देश अपनी जरूरत की 15 फीसदी से कम प्राकृतिक गैस रूस से खरीदता है और रूस से आयात कम करने की दिशा में कदम उठा रहा है तो उस पर यह टैरिफ लागू नहीं होने की संभावना है.
भारतअमेरिका ट्रेड डील पर भी असर का सवाल
इस पूरे मामले का समय भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. व्हाइट हाउस के नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने कहा कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों का भारतअमेरिका व्यापार बातचीत पर असर पड़ेगा या नहीं, तो फैसला बातचीत कर रही टीमों पर निर्भर करेगा. उन्होंने इस बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया. इससे साफ है कि अमेरिका अभी भारत के साथ चल रही ट्रेड डील की बातचीत और रूस से भारत की तेल खरीद के मुद्दे को अलगअलग तरीके से देख रहा है. हालांकि, आगे चलकर दोनों मुद्दों के बीच संबंध बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
भारत के लिए क्या है बड़ी चिंता?
भारत लंबे समय से रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा है. इससे भारतीय तेल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदने में मदद मिली है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण रहा है. अगर अमेरिका भारत पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला करता है, तो भारतीय सामान के लिए अमेरिकी बाजार में पहुंच महंगी हो सकती है. इससे भारत के निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि भारत पर निश्चित रूप से 100 फीसदी टैरिफ लगेगा. फिलहाल यह सिर्फ प्रस्तावित कानून है और इसे अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलना बाकी है.
भारतअमेरिका ट्रेड डील की राह में नई चुनौती
फरवरी 2026 में भारत और अमेरिका ने एक अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर घोषणा की थी. इसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 18 फीसदी तक कम करने का प्रस्ताव रखा था. इसके बदले भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा और तकनीकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने की बात सामने आई थी. हालांकि, बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद टैरिफ व्यवस्था में बदलाव आया और अमेरिकी प्रशासन को दूसरे कानूनी प्रावधानों का सहारा लेना पड़ा. फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. दोनों देश टैरिफ कम करने, बाजार तक बेहतर पहुंच और व्यापारिक संबंध मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं. अब रूस से भारत की तेल खरीद पर प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंध इस बातचीत के लिए एक नई चुनौती बन सकते हैं.