
अमृत विचार, बरेली : अकीदत और मुहब्बत की खुशबू से आला हजरत का गुलशन महक उठा। देशदुनिया से लाखों अकीदतमंद उर्से रजवी की रौनक बने। मकरजे अहले सुन्नत में हाजिरी दी। पूरा शहर जैसे थम सा गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां और मौलाना तौसीफ मियां ने दुआ की। लाखों का मजमा बड़ी तसल्ली के साथ दुआ में हाथ उठाए रहा। जितनी शांति के साथ रजा के दीवाने बरेली शहर में दाखिल हुए, उतने ही सुकून के साथ अपने घरों को लौट गए। इस खुशनुमा नजारे के बीच बरेली ने एक बार अपनी गंगाजमुनी तहजीब की छाप छोड़ी। सावन में कांवड़ यात्रा के बीच बड़े अमनचैन के साथ उर्से रजवी संपन्न हो गया।
उर्से रजवी के मंच से उलमा ने कौम को खिताब किया। तालीम से लेकर तहजीब और देशभक्ति से लेकर मुल्क की तरक्की और खुशहाली तक, मिलकर आगे बढ़ने का सबक दिया।
मुफ्ती सलीम नूरी ने कहा कि जश्नएईद मिलादुन्नबी करीब है। दुनियाभर के मुसलमान पैगंबरएइस्लाम की पैदाइश का जश्न मनाएंगें। अपने घरों पर इस्लामिक झंडे लगाएंगे। लेकिन पिछले सालों में कुछ लोगों पर केवल झंडा भर लगाने से मुकदमें दर्ज हुए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्हें पाकिस्तानी झंडा समझ लिया गया। जरूरी नहीं कि हरा झंडा ही लगाएं। दूसरे रंग का भी लगा सकते हैं। चुनावी माहौल है। राजनीति से खबरदार रहें। हिंदूमुसलमान मिलकर भारत को विश्वगुरु बनाएं। उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी भी मजहब से कोई टकराव नहीं चाहता। मंच पर दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हानी मियां, तमाम दरगाहों के सज्जादगान और उलमा मौजूद रहे।
सुन्नियत की सभी खानकाहों का मरकज
मुफ्ती आकिल रजवी ने कहा कि बरेली सिर्फ बरेलवियों का ही मरकज नहीं है बल्कि सुन्नियत का काम करने वाल सभी खानकाहों का मरकज है। मुफ़्ती इमरान हनफी ने कहा कि आला हज़रत की इल्मी कारनामें पर आज दुनिया हैरान है। दुनिया भर में आपके इल्म का डंका बज रहा है।
तालीम से संवारें जिंदगी
अल्लामा तौसीफ रज़ा मिस्बाही और मौलाना साजिद रजा ने मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक हालात पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी मुसलमाना पिछड़ा क्यों हैइसलिए क्योंकि हम शिक्षा में पीछे हैं। हमें सुरक्षा चाहिए तो अपने बच्चों को शिक्षित करना होगा। उन्हें आईएएस, आईपीएस, इंजीनीयर और डॉक्टर बनाने की जरूरत है।
गरीबों को दें उनका हक
मौलाना जाहिद रज़ा ने अमीर मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहा कि अपने माल से गरीबों को उनका हक दें। यह दगराह के सज्जादानशीन का पैगाम है। कश्मीर से आए मौलाना फारूक नक्शबंदी और मौलाना मुख्तार बहेड़वी ने सोशल मीडिया और उसके इस्तेमाल पर तकरीर करते हुए कहा कि दीन यूट्यूबरों से नहीं बल्कि आला हज़रत और सुन्नी उलेमा की किताबों से सीखें। नमाज़ की पाबंदी करें। बिना दहेज़ की शादियों पर जोर दिया।
मस्जिदों पर बुलडोजर की टीस
मुफ्ती जिलानी ने कहा कि आज मुसलमानों में जागरुकता की जरूरत है। हालात ये हैं कि मस्जिदों पर बुलडोज़र चलाकर उन्हें शहीद किया जा रहा है। हमारे एक उलेमा चार साल से जेल में बंद हैं। आला हज़रत के शहज़ादे बिना नाम लिए पिछले एक साल से जेल में बंद है और हम लोग अब भी संजीदा नहीं है।
इस मौके खानकाहे तहसीनिया के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रज़ा खान, नबीरे आला हज़रत, अहसान रज़ा, शीरान रज़ा खान, मोअज्जम रज़ा खान, जुबैर रज़ा खान, सय्यद मुस्तफा मियां, दरगाह शाहदाना वली के प्रबंधक अब्दुल वाजिद नूरी के अलावा बड़ी संख्या में उलमा मौजूद रहे।