बदलते मौसम में बुखारखांसी का डर! ये आयुर्वेदिक तरीके आएंगे काम, करें ये योगासन

बदलते मौसम में बुखारखांसी का डर! ये आयुर्वेदिक तरीके आएंगे काम, करें ये योगासन

बारिश के मौसम से गर्मी कम जरूर हो जाती है लेकिन कई हेल्थ प्रॉब्लम्स के होने का डर बढ़ जाता है. खासतौर पर बच्चों में बुखारखांसी का खतरा बढ़ जाता है. एक्सपर्ट कहते हैं बाहर हल्की ठंड और शरीर के हल्का गर्म होने की वजह से टेंपरेचर बिगड़ने लगता है. इस थोड़े से चेंज की वजह से कमजोर इम्यूनिटी वालों को कोल्ड हो जाता है. बारिश के मौसम में हल्की ठंडी और ताजगी महसूस होती है पर इस दौरान शरीर का खास ध्यान रखना भी जरूरी है.

बदलते मौसम में बुखारखांसी का डर! ये आयुर्वेदिक तरीके आएंगे काम, करें ये योगासन

बच्चे स्कूल जाते हैं और किसी वजह से थोड़े भी वो भीग जाए तो थोडी देर बाद बुखार चढ़ने की प्रॉब्लम हो जाती है. एक्सपर्ट के जरिए जानें कि बारिश के मौसम में कैसा खानपान होना चाहिए और किन आसान योगासन को किया जा सकता है.

मानसून में आते हैं ये बदलाव

इस मौसम में सुस्ती आना, गले में खराश होना, या सर्दी लगना आम बात है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस समय, आपके शरीर में वात, पित्त और कफ असंतुलित हो जाते हैं. जिसके कारण आपकी पाचन क्रिया भी कमजोर हो सकती है. ऐसे में आपको अपने खानपान और दिनचर्या पर खास ध्यान देना चाहिए, ताकि आपका शरीर संक्रमण से बच सके.

आयुर्वेदिक काढ़ा

आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों, मसालों और औषधीय पौधों को उबालकर काढ़ा तैयार किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, यह पाचन को बेहतर बनाने, कफ को संतुलित करने और शरीर की प्राकृतिक रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए फायदेमंद माना जाता है.

काढ़ा बनाने का सही तरीका

तुलसी, अदरक और काली मिर्च का काढ़ा दो कप पानी में 1012 तुलसी के पत्ते, कुचला हुआ अदरक का एक छोटा टुकड़ा और 34 कुटी हुई काली मिर्च डालकर तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए. इसके बाद, मिश्रण को छान लें और हल्का गर्म होने पर, पीने से पहले इसमें स्वादानुसार गुड़ मिलाएं.

गिलोय, हल्दी और पुदीने वाला काढ़ा गिलोय के तने का एक छोटा टुकड़ा कूट लें और इसे दो कप पानी में डालें. इसमें आधा चम्मच हल्दी और 45 पुदीने की पत्तियां मिलाएं, फिर इस मिश्रण को तब तक उबालें जब तक पानी अपनी शुरुआती मात्रा का आधा न रह जाए. आखिर में, इस मिश्रण को छान लें और स्वाद के लिए इसमें मिश्री या सेंधा नमक मिलाकर हल्का गर्म होने पर ही पिएं.

दालचीनी, लौंग और काली मिर्च का काढ़ा दो कप पानी में दालचीनी का टुकड़ा, 23 लौंग, 34 काली मिर्च और तुलसी की कुछ पत्तियां डालकर उबालें. जब पानी उबलकर आधा रह जाए, तो इसे छान लें और हल्का गर्म होने पर पी लें.

हल्का आहार इस मौसम में हल्का, ताज़ा और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे अच्छा रहता है. भारी, तलाभुना और बासी खाना पाचन शक्ति को और कमज़ोर कर सकता है. मानसून में नमी के कारण इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए बाहर का खाना या बिना ढका हुआ खाना खाने से बचना चाहिए. खानपान में मूंग की दाल, उबली हुई सब्जियां और हल्के मसालों से बनी चीजें शामिल करनी चाहिए.

योग आसन इस मौसम में शरीर को चलाऊ रखने के लिए व्यायाम करना बेहद जरूरी है. इससे शरीर सक्रिय रहता है और पाचनअग्नि का संतुलन बना रहता है. इस मौसम में योग के ये आसन विशेष रूप से फायदेमंद माने जाते हैं:

वज्रासन

त्रिकोणासन

सेतुबंधासन और

पादहस्तासन

एक्सपर्ट ने बताईं सावधानियां

डॉ चंचल शर्मा कहती हैं कि काढ़ा फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए. आमतौर पर, दिन में एक या दो बार आधा कप काढ़ा लेना काफी माना जाता है. यदि आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं, या नियमित दवा ले रही हैं, तो नियमित रूप से किसी भी आयुर्वेदिक काढ़े का सेवन करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें.

ठंडा पानी, आइसक्रीम और फ्रिज में रखी ठंडी चीज़ों से बचें, सिर्फ़ उबला हुआ पानी पिएं और घर में फर्श पर पानी जमा न होने दें, ताकि मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके. इसके साथ ही, साफसफाई बनाए रखना भी ज़रूरी है, क्योंकि इस मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. ताज़े फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोने के बाद ही खाना चाहिए.

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