
कानपुर: हरियाली अमावस्या के दिन 12 अगस्त 2026, बुधवार को साल का एक प्रमुख सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा।
हालांकि, भारत में इस सूर्य ग्रहण की दृश्यता नहीं होगी। ऐसे में प्रचलित धार्मिक मान्यता के अनुसार भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
ज्योतिषाचार्य पं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। मनोज कुमार द्विवेदी के अनुसार, 12 अगस्त को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक जिन स्थानों पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल लागू नहीं माना जाता।
इसी वजह से भारत में इस ग्रहण के दौरान सामान्य रूप से भोजन बनाने, मंदिर जाने, पूजापाठ करने या शुभ कार्यों को रोकने की आवश्यकता नहीं होगी।
गर्भवती महिलाओं के लिए भी विशेष प्रतिबंध नहीं
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने की स्थिति में गर्भवती महिलाओं के लिए भी इस ग्रहण को लेकर किसी विशेष धार्मिक प्रतिबंध की आवश्यकता नहीं है। सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां पर्याप्त हैं।
उन्होंने लोगों से ग्रहण को लेकर फैले भय या अप्रमाणित बातों पर भरोसा नहीं करने की अपील की।
15 दिन के भीतर दो ग्रहण का संयोग
अगस्त 2026 में एक ही पखवाड़े के भीतर दो बड़े ग्रहण पड़ने जा रहे हैं। पहला ग्रहण 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण के रूप में होगा, जबकि दूसरा 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन पूर्णिमा के अवसर पर आंशिक चंद्र ग्रहण होगा।
इस तरह करीब 15 दिनों के अंतराल में सूर्य और चंद्र ग्रहण का यह संयोग बन रहा है।
भारत में नहीं दिखेंगे दोनों ग्रहण
दिए गए विवरण के अनुसार, अगस्त में होने वाले दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। इसलिए यहां इनका सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन के त्योहार पर भी ग्रहण के कारण किसी धार्मिक व्यवधान की बात नहीं है।
ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने लोगों से ग्रहण से संबंधित धार्मिक मान्यताओं को समझते हुए अनावश्यक भय और अप्रमाणित दावों से बचने की सलाह दी है।