व्यापार घाटा $30.4 बिलियन के पार! टेंशन में क्यों नहीं है सरकार? यहां समझें पूरा गणित

व्यापार घाटा .4 बिलियन के पार! टेंशन में क्यों नहीं है सरकार? यहां समझें पूरा गणित

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, वॉर के कारण फर्टीलाइजर के इंपोर्ट में आने वाली परेशानी की कीमतों में इजाफा होने के कारण देश का करंट अकाउंट डेफिसिट जून के महीने में 30 अरब डॉलर के पार चला गया था, जोकि 5 महीने का हाई था. उसके बाद भी सरकार की ओर से कोई टेंशन बात नहीं कही जा रही है. संसद में संबंधित मंत्रालय के मंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा कि किसी एक महीने का बढ़ता हुआ व्यापार घाटा पूरे साल की परफॉर्मेंस को जस्टीफाई नहीं करता है. साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि जून का कैड एवरेज कैड से मामूली रूप से ही ज्यादा है. जिसकी वजह से कोई चिंता वाली बात ही नहीं है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार ने संसद में ​इस मामले में किस तरह की जानकारी नहीं है.

सरकार को बढ़ते कैड की टेंशन नहीं

मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट मोटे तौर पर हाल के औसत के अनुरूप है और यह बाहरी सेक्टर में किसी स्ट्रक्चरल कमजोरी को नहीं दिखाता है. साथ ही, सरकार इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए रणनीतिक सेक्टर में घरेलू क्षमता को मजबूत कर रही है. मंत्रालय ने कहा कि जून 2026 में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट 30.4 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो पांच महीने का उच्चतम स्तर है, लेकिन यह 12 महीने के 29.3 अरब अमेरिकी डॉलर के औसत से थोड़ा ही अधिक था. मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी एक महीने का घाटा अपने आप में कुल व्यापार प्रदर्शन को नहीं दर्शाता है.

इंपोर्ट में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

मंत्री ने कहा कि अधिक घाटा मुख्य रूप से तेजी से बढ़ती इकोनॉमी के लिए जरूरी इंपोर्ट को दर्शाता है, जिसमें कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और कैपिटल गुड्स, सोना, खाद और ऊर्जा सुरक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विस्तार के लिए आवश्यक अन्य इंटरमीडिएट इनपुट शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 202526 में भारत के कुल आयात में पेट्रोलियम उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत थी, जबकि मशीनरी और कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग एकचौथाई थी.

कुल आयात में सोना, कीमती पत्थर और रत्नों की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत थी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार, मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट में वृद्धि मुख्य रूप से आर्थिक विकास, औद्योगीकरण और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए आवश्यक जरूरी और उत्पादक वस्तुओं के अधिक आयात को दर्शाती है, न कि भारत के बाहरी सेक्टर में किसी स्ट्रक्चरल कमजोरी को.

मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 202526 में भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट घटकर जीडीपी का 0.6 प्रतिशत हो गया, जबकि जून 2026 में विदेशी मुद्रा भंडार 671.6 अरब अमेरिकी डॉलर था. इसने कहा कि मजबूत सर्विस ट्रेड सरप्लस, रेमिटेंस का आना और स्थिर कैपिटल फ्लो ने भी बैलेंस ऑफ पेमेंट को सहारा देना जारी रखा.

सरकार इन सब पर दे रही है ध्यान

आगे बढ़ते हुए, सरकार ने कहा कि वह इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रिन्यूएबल एनर्जी, महत्वपूर्ण खनिजों और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में घरेलू क्षमता को मजबूत करके रणनीतिक आयात पर निर्भरता कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है.

इसके लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम, पीएम गति शक्ति, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी और नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम जैसे उपायों के साथसाथ सप्लाईचेन रेजिलिएंस पहल और टेक्नोलॉजी अपनाने और इनोवेशन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार कच्चे तेल, फर्टिलाइजर और दूसरी ज़रूरी चीज़ों के सोर्स में विविधता ला रही है.

साथ ही, वह ज़रूरी इंपोर्ट पर नज़र रख रही है और ट्रेड रेमेडीज़, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर, ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ को लागू करने और टैरिफ को तर्कसंगत बनाने जैसे उपाय अपना रही है. मंत्रालय ने कहा कि इन कोशिशों का मकसद बाहरी जोखिमों को कम करना और एक मज़बूत व ग्लोबल स्तर पर कॉम्पिटिटिव इकॉनमी बनाना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *