पर्दे और पिच के सितारे भी हुए NSE के दीवाने! IPO से पहले अनलिस्टेड शेयर्स खरीदने की लगी होड़

पर्दे और पिच के सितारे भी हुए NSE के दीवाने! IPO से पहले अनलिस्टेड शेयर्स खरीदने की लगी होड़

बॉलीवुड स्टार्स और क्रिकेट के दिग्गज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित पब्लिक डेब्यू पर दांव लगा रहे हैं. वे हाल के महीनों में इसके अनलिस्टेड शेयर खरीद रहे हैं, ताकि संभावित रूप से फायदेमंद IPO से मुनाफा कमा सकें. NSE का IPO इस साल के आखिर में आने वाला है.

इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने बताया कि सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, आमिर खान, अनिल कपूर, सारा अली खान और गौरी खान उन मशहूर हस्तियों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में NSE के अनलिस्टेड शेयर खरीदे हैं.

यह होड़ तब मची है जब निवेशक भारत की सबसे बड़ी स्टॉकमार्केट लिस्टिंग में से एक हो सकने वाली इस घटना का आकलन कर रहे हैं, जबकि NSE के ट्रांजैक्शन रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा लाने वाली ऑप्शन ट्रेडिंग को कड़ी रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ रहा है.

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज, NSE ने जून में मार्केट रेगुलेटर के पास IPO के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था. इसमें मौजूदा इंस्टीट्यूशनल शेयरधारकों द्वारा 149 मिलियन शेयरों तक की बिक्री शामिल है, जो NSE की पेडअप कैपिटल का लगभग 6 फीसदी है. इस ट्रांजैक्शन के तहत कोई नई इक्विटी कैपिटल जारी नहीं की जाएगी.

नहीं आया कोई बयान

नाम न बताने की शर्त पर एक व्यक्ति ने कहा कि कुछ टॉप हस्तियों ने पिछले दोतीन महीनों में NSE शेयरों में निवेश किया है, ताकि प्रस्तावित IPO के जरिए भारी रिटर्न कमा सकें. खास बात यह है कि जो लोग अनलिस्टेड शेयर खरीदते हैं, वे लिस्टिंग के छह महीने तक उन्हें बेच नहीं सकते.

ऊपर बताई गई हस्तियों के प्रवक्ताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अनलिस्टेड मार्केट में NSE शेयर खरीदने वाले अमीर निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि एक्सचेंज का वैल्यूएशन अपने लिस्टेड प्रतिद्वंद्वी BSE की तुलना में अधिक आकर्षक है, भले ही NSE की मार्केट वैल्यू BSE की तुलना में लगभग चार गुना है.

एनएसई का मार्केट कैप

NSE के डेटा के अनुसार, मंगलवार को BSE के शेयर 3,605 रुपए पर ट्रेड कर रहे थे, जिससे एक्सचेंज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.47 लाख करोड़ रुपए ट्रिलियन और प्राइसटूअर्निंग्स मल्टीपल 51.98 गुना हो गया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अगर तुलना करें तो, NSE का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन अनलिस्टेड मार्केट में 5.5 ट्रिलियन डॉलर है.

अनलिस्टेड और प्रीIPO शेयरों के लिए ऑनलाइन जानकारी देने वाले प्लेटफॉर्म ‘UnlistedZone’ पर इसकी अनुमानित कीमत 2,035 रुपए है, जिसके आधार पर यह 49.48 गुना के P/E मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है. इंडिपेंडेंट मार्केट एनालिस्ट अंबरीश बलिगा ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि अनलिस्टेड शेयरों में डील करने वाले ब्रोकर अपने बहुत अमीर क्लाइंट्स का ध्यान खींचने के लिए आकर्षक वैल्यूएशन का तर्क देते हैं.

साथ ही, संभावित निवेशक पिछले परफॉर्मेंस को देखते हैं, जो NSE के मामले में बहुत शानदार रहा है. UnlistedZone के अनुसार, पिछले तीन सालों में NSE के शेयरों में 175 फीसदी की बढ़त हुई है.

एनएसई का निवेशकों में दबदबा

भारतीय बाजार में एक्सचेंज का दबदबा इस निवेश की कहानी का एक बड़ा हिस्सा है. जून के आखिर में इक्विटी कैश ट्रेडिंग में NSE की हिस्सेदारी 93.1 फीसदी थी, जबकि BSE के पास सिर्फ 6.9 फीसदी हिस्सा था. एक्सचेंज के डेटा के अनुसार, इक्विटी ऑप्शंस में जो दोनों एक्सचेंजों के लिए ट्रांजैक्शन से होने वाली कमाई का सबसे अहम जरिया है NSE की हिस्सेदारी 69.4 फीसदी थी और बाकी हिस्सा BSE के पास था.

फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट वाले शेयरों के लिए हाल ही में शुरू किए गए ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ में इसका दबदबा और भी साफ़ दिखता है, जहां पिछले हफ्ते के ज्यादातर समय NSE की हिस्सेदारी 99 फीसदी तक रही. हालांकि, कुछ अनुभवी मार्केट एक्सपर्ट्स ने सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि नवंबर 2024 से वीकली ऑप्शंस ट्रेडिंग पर रेगुलेटरी नियम कड़े किए गए हैं, जिसकी वजह रिटेल निवेशकों को हुआ भारी नुकसान है.

नुकसान होने की भी संभावना

जानेमाने निवेशक शंकर शर्मा ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि जिस चीज से एक्सचेंज को बहुत ज्यादा ट्रांजैक्शन रेवेन्यू और सरकार को टैक्स मिलता है, वही चीज व्यक्तिगत निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए भारी नुकसान का कारण भी बनती है.

शर्मा ने आगे कहा कि अगर ऐसे प्रोडक्ट में ट्रेडिंग करने वाले 91 फीसदी रिटेल निवेशक नुकसान उठाते हैं और 8 फीसदी को बहुत कम मुनाफा होता है, तो इसे लंबे समय तक मुनाफा देने वाला नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब वॉल्यूम के मामले में इसमें पहले ही चारपांच साल तक जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा चुकी हो.

जुलाई 2025 में सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया की एक स्टडी से पता चला कि पर्सनल ट्रेडर्स को वित्त वर्ष 2025 में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में 1.05 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जो वित्त वर्ष 2024 में हुए 74,812 करोड़ रुपए के नुकसान से ज्यादा था.

इस वजह से रेगुलेटर को नवंबर 2024 से कॉन्ट्रैक्ट साइज को तीन गुना करना पड़ा, साप्ताहिक एक्सपायरी को हर एक्सचेंज पर कई की जगह सिर्फ एक तक सीमित करना पड़ा, और ऑप्शन एक्सपायरी के दिन रिस्क मार्जिन बढ़ाना पड़ा.

वित्त वर्ष 2026 के लिए स्टडी का इंतजार है. एक्सचेंज के डेटा से पता चला कि वित्त वर्ष 2026 में इक्विटी ऑप्शंस का एक्सचेंज के 13,057 करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन रेवेन्यू में 76.55 फीसदी योगदान था, जो एक्सचेंज के 16,601 करोड़ रुपए के कुल ऑपरेटिंग रेवेन्यू का 79 फीसदी था.

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