Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में करीब 26 साल पुराने लूट, अपहरण और फिरौती के लिए हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. अपर जिला सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या3 ने मामले में दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. अदालत ने उस पर 1.10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. मामला छपार थाना क्षेत्र का है, जहां लकड़ी बेचने जा रहे तीन भाइयों को हथियारबंद बदमाशों ने अगवा किया था. बाद में फिरौती की रकम में देरी होने पर उनके पिता की हत्या कर दी गई थी.

शिकायतकर्ता के मुताबिक, करीब 26 साल पहले तेजालेहड़ा गांव निवासी तीन भाई हारून, आबाद और मुकर्रम ट्रैक्टरट्रॉली से लकड़ी बेचने हरियाणा जा रहे थे. कमहेड़ा रजवाहे के रास्ते पर हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें रोक लिया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बदमाशों में शौकीन, एहसान और शाहनवाज शामिल थे. इस दौरान आबाद किसी तरह मौके से भाग निकलने में सफल रहा, जबकि उसके भाइयों का अपहरण कर लिया गया.
बदमाशों ने परिजनों से पांच लाख रुपये की फिरौती मांगी. इसके लिए उनके पिता सलीम को फिरौती की चिट्ठी भेजी गई. बेटों को छुड़ाने के लिए सलीम बदमाशों तक पहुंचे तो आरोप है कि उन्होंने बेटों को छोड़कर सलीम को ही अपने कब्जे में ले लिया और फिरौती की रकम लाने के लिए कहा.
फिरौती में देरी हुई तो कर दी हत्या
पीड़ित के अनुसार, रकम मिलने में देरी होने पर बदमाशों ने सलीम की बेरहमी से हत्या कर दी. आरोप है कि चाकू से गला रेतकर उनकी जान ले ली गई. इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया.
मामले में आरोपी शौकीन और एहसान की बाद में पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई, जबकि शाहनवाज किसी अन्य मामले में जेल में सजा काट रहा था. इसी दौरान इस पुराने मामले की न्यायिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ती रही.
सात गवाहों ने दी गवाही
सरकारी अधिवक्ता कुलदीप कुमार सिंह के मुताबिक, अभियोजन की ओर से मामले में सात गवाह पेश किए गए. इनमें घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी शामिल थे. अभियोजन ने अदालत के सामने मामले से संबंधित साबूतों और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर अदालत ने शाहनवाज को दोषी माना. अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 364A, 302 और 201 के तहत दोषी पाए जाने पर शाहनवाज को मृत्युदंड और 1.10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई.
न्याय का उद्देश्य केवल निर्णय सुनाना नहीं
सजा सुनाते हुए पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि न्याय का उद्देश्य केवल निर्णय सुनाना नहीं है, बल्कि समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना भी है. 26 साल पुराने इस मामले में फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है. कोर्ट के निर्णय के बाद अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी जारी रहेगी.