शेयर बाजार में निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों की एक आम आदत होती है. जब बाजार में गिरावट का दौर आता है, तो वे डरकर अपना पैसा निकाल लेते हैं और यह सोचते हैं कि जब बाजार बिल्कुल नीचे चला जाएगा, तब वापस अपना पैसा लगा देंगे. बाजार की चाल को पहले से भांपने की इस कोशिश को ‘मार्केट टाइमिंग’ कहा जाता है. लेकिन क्या सच में बाजार की चाल को ऐसे पकड़ा जा सकता है? एबाकस म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट बताती है कि निवेशकों की ये प्लान उन पर कितनी भारी पड़ सकती है.

यह रिपोर्ट अप्रैल 2005 से लेकर जुलाई 2026 तक के 21 सालों के आंकड़ों पर आधारित है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर आपने इन 21 सालों के लंबे सफर में शेयर बाजार के सबसे अच्छे प्रदर्शन वाले कुछ दिन भी छोड़ दिए, तो आपका कुल मुनाफा तेजी से नीचे गिर सकता है.
निफ्टी 50 में 5 दिन की चूक से मुनाफे का सफाया
चलिए इसे निफ्टी 50 के आंकड़ों से समझते हैं. जिन निवेशकों ने पूरे 21 साल तक बिना घबराए अपना पैसा बाजार में लगाए रखा, उन्हें 13.67 फीसदी का शानदार सालाना चक्रवृद्धि ब्याज मिला. लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब आप बाजार के बेहतरीन दिन मिस कर देते हैं. अगर किसी निवेशक ने इन 21 सालों में शेयर बाजार के सबसे अच्छे सिर्फ पांच दिन मिस कर दिए, तो उसका मुनाफा घटकर 11.31 फीसदी रह गया.
अगर 10 सबसे अच्छे दिन छूट गए, तो यह रिटर्न और गिरकर 9.75 फीसदी पर आ गया. यह नुकसान यहीं नहीं रुकता है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जिन लोगों ने बाजार में 30 सबसे अच्छे दिन गंवा दिए, उनका मुनाफा सिर्फ 4.68 फीसदी रह गया. वहीं, अगर कोई 50 बेहतरीन दिन बाजार से बाहर रहा, तो उसे केवल 1 फीसदी का मामूली रिटर्न मिला. यानी आपकी जरा सी टाइमिंग की चूक ने आपके पूरे मुनाफे को लगभग खत्म कर दिया.
निफ्टी 100 में भी यही है हाल
निफ्टी 100 इंडेक्स के आंकड़े भी बिल्कुल यही कहानी बयां करते हैं. अगर कोई निवेशक पूरे 21 साल तक बाजार में डटा रहा, तो उसे 14 फीसदी का सालाना रिटर्न मिला. वहीं, सबसे अच्छे पांच दिन बाजार से बाहर रहने पर यह मुनाफा घटकर 11.68 फीसदी हो गया. 10 दिन मिस करने वालों को 10.10 फीसदी और 30 दिन मिस करने वालों को 5.07 फीसदी रिटर्न ही मिल सका. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 50 दिन मिस करने वालों का है, जिन्हें इतने लंबे समय तक निवेश करने के बावजूद सिर्फ 1.40 फीसदी के रिटर्न से संतोष करना पड़ा. पिछले 21 सालों में निफ्टी 100 ने 20 फीसदी से ज्यादा की पांच बड़ी गिरावटें देखी हैं. औसतन हर 4.2 साल में बाजार ने ऐसा गोता लगाया है.
छोटे शेयरों में टाइमिंग का खेल
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तो यह अंतर और भी ज्यादा बड़ा है. निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स में लगातार पैसा लगाए रखने वालों ने 17.20 फीसदी का मोटा मुनाफा कमाया. लेकिन बेहतरीन 5 दिन मिस करने वालों का रिटर्न गिरकर 15.12 फीसदी और 10 दिन मिस करने वालों का 13.61 फीसदी रह गया.
स्मॉलकैप 250 इंडेक्स की बात करें, तो पूरे समय डटे रहने वाले निवेशकों ने 15.80 फीसदी का रिटर्न हासिल किया. लेकिन सबसे अच्छे 30 दिन छूटने पर यह मुनाफा लगभग आधा होकर 8.25 फीसदी रह गया. 50 दिन मिस करने पर तो रिटर्न महज 4.91 फीसदी पर आ गिरा. स्मॉलकैप ने पिछले 21 सालों में 6 बार 20 फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट झेली है, जो औसतन हर साढ़े तीन साल में आती है.
गिरावट के बाद तेजी जरूर आती है
बाजार में गिरावट आती है, लेकिन वह वापस भी उठता है, हालांकि इसमें समय लगता है. निफ्टी 50 ने 1991 से 2026 के बीच 20 फीसदी से ज्यादा की दो बड़ी गिरावट देखी. जनवरी 2020 में कोरोना संकट के दौरान यह इंडेक्स सिर्फ 69 दिनों में 38.4 फीसदी टूट गया था, लेकिन इसकी वापसी बहुत तेज रही और 300 दिनों में यह पूरी तरह रिकवर हो गया. इसके उलट, जनवरी 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट बहुत गहरा था. तब निफ्टी 50 लगभग 60 फीसदी गिर गया था और इसे उबरने में 1,032 दिन यानी लगभग तीन साल लग गए.
मिडकैप और स्मॉलकैप को तो 2008 के इस संकट से बाहर आने में और भी लंबा वक्त लगा था. मिडकैप इंडेक्स 73.4 फीसदी गिरा था और उसे पूरी तरह उबरने में कुल 2,328 दिन लगे. वहीं स्मॉलकैप इंडेक्स को अपने 76 फीसदी की गिरावट वाले गड्ढे से पूरी तरह बाहर निकलने में 2,442 दिन का लंबा समय लगा. जनवरी 2018 से मई 2021 के बीच भी स्मॉलकैप इंडेक्स 60.8 फीसदी गिरा था, जिसे उबरने में कुल 1,211 दिन लग गए थे.
निवेशकों के लिए क्या है सबक
ये सारे आंकड़े इस बात का पक्का सबूत हैं कि शेयर बाजार में ‘मार्केट टाइमिंग’ का खेल आम निवेशक के बस का नहीं है. बाजार के सबसे मजबूत कुछ दिनों में निवेश से बाहर रहना, लगातार निवेशित रहने के मुकाबले बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान कराता है. आप बाजार के अच्छे दिनों से जितने ज्यादा दिन बाहर रहेंगे, आपके रिटर्न और मुनाफे के बीच की खाई उतनी ही चौड़ी होती जाएगी. इसलिए, 21 सालों का यह सफर सिखाता है कि गलत दिन बाजार से बाहर रहकर नुकसान उठाने से कहीं ज्यादा समझदारी इसी में है कि आप बिना घबराए अपना पैसा बाजार में लगाए रखें.