रिटायरमेंट के बाद भी देना पड़ सकता है टैक्स, 7 तरह की इनकम पर होती है IT की नजर

रिटायरमेंट के बाद भी देना पड़ सकता है टैक्स, 7 तरह की इनकम पर होती है IT की नजर

रिटायरमेंट के बाद नौकरी और सैलरी भले ही बंद हो जाए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी हर तरह की आय टैक्स फ्री हो जाती है. रिटायरमेंट के बाद भी पेंशन, बैंक FD का ब्याज, किराये से कमाई, शेयरों से डिविडेंड और निवेश बेचने पर होने वाला मुनाफा आपकी टैक्स देनदारी में शामिल हो सकता है.

इसलिए सीनियर सिटीजन के लिए यह समझना जरूरी है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली कौनसी रकम पर टैक्स लगता है और कौनसी रकम को टैक्स से छूट मिल सकती है. इससे ITR भरते समय गलती होने और टैक्स विभाग से नोटिस आने का खतरा कम हो सकता है.

रिटायरमेंट के बाद कौनसी आय पर टैक्स लग सकता है?

1. हर महीने मिलने वाली पेंशन

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सामान्य यानी अनकम्यूटेड पेंशन आम तौर पर टैक्सेबल होती है. इसे आय के रूप में दिखाना पड़ता है. लागू नियमों और चुने गए टैक्स रिजीम के अनुसार इस पर स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ भी मिल सकता है.

2. FD और सेविंग्स का ब्याज

सेविंग अकाउंट, FD, RD, पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट और सीनियर सिटीजन स्कीम से मिलने वाला ब्याज आम तौर पर टैक्सेबल होता है. पुराने टैक्स रिजीम में सीनियर सिटीजन को सेक्शन 80TTB के तहत योग्य ब्याज आय पर ₹50,000 तक की कटौती मिल सकती है. नए टैक्स रिजीम में यह कटौती उपलब्ध नहीं है.

3. किराये से होने वाली कमाई

अगर रिटायरमेंट के बाद घर या दुकान जैसी प्रॉपर्टी किराये पर दी गई है तो उससे मिलने वाला किराया भी टैक्स के दायरे में आता है. घर से मिलने वाली किराये की आय पर नियमों के अनुसार 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन और कुछ अन्य योग्य कटौतियों का लाभ मिल सकता है.

4. शेयर और म्यूचुअल फंड से मुनाफा

शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन या दूसरी संपत्ति बेचने पर होने वाला कैपिटल गेन भी टैक्सेबल हो सकता है. टैक्स कितना लगेगा, यह संपत्ति के प्रकार, उसे कितने समय तक रखा गया और लागू कैपिटल गेन नियमों पर निर्भर करता है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। म्यूचुअल फंड बेचने, स्कीम बदलने या शेयर बेचने के दौरान सही जानकारी ITR में देना जरूरी है, क्योंकि इन लेनदेन की जानकारी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS में दिखाई दे सकती है.

5. डिविडेंड और इंश्योरेंस से मिलने वाली पेंशन

इंश्योरेंस कंपनी से मिलने वाली एन्युटी या पेंशन आम तौर पर जिस साल प्राप्त होती है, उसी साल टैक्सेबल होती है. इसी तरह शेयरों से मिलने वाला डिविडेंड भी निवेशक की आय माना जाता है और उस पर लागू नियमों के अनुसार टैक्स देना पड़ सकता है.

6. कंसल्टेंसी या पार्टटाइम काम की आय

रिटायरमेंट के बाद अगर कोई व्यक्ति कंसल्टेंसी, फ्रीलांसिंग या पार्टटाइम प्रोफेशनल काम करता है तो उससे होने वाली कमाई भी टैक्सेबल हो सकती है.

7. इस इनकम पर भी टैक्स

FD में जमा रकम पर मिलने वाला जमा ब्याज, इनकम टैक्स रिफंड पर मिलने वाला ब्याज, पति या पत्नी को मिलने वाली फैमिली पेंशन और कुछ निवेश योजनाओं से मिलने वाली टैक्सेबल रकम को भी ITR में सही तरीके से दिखाना जरूरी है.

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