
अयोध्या, अमृत विचार : श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे के गबन मामले में पुलिस की जांच अंतिम चरण में पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, छह आरोपियों पर चोरी का आरोप तय होने की संभावना है, जबकि गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव पर षडयंत्र रचने और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पर षड्यंत्र रचने के साथ सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने का भी आरोप लग सकता है। सूत्रों के अनुसार पुलिस सितंबर माह के अंत तक आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर सकती है।
जून 2026 में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन की तहरीर पर राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को नामजद किया गया। सभी आठों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जांच में अब तक करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं।
जांच में सामने आया कि दानपात्रों की चाबियां टिन्नू यादव के पास थीं, जबकि वे ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के करीबी और पूर्व ड्राइवर थे। गणना कक्ष में सीसीटीवी फुटेज निर्धारित 180 दिनों के बजाय केवल 45 दिनों तक रखी जाती थी। एसआईटी ने अप्रैलजून के फुटेज में दर्जनों बार नकदी छिपाने के दृश्य देखे। टिन्नू पर पुराने फुटेज हटाने या मिटवाने का संदेह जांच में गहराया है।
रिटायर्ड बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव गिनती की पूरी व्यवस्था के प्रभारी थे। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने टिन्नू की शह पर अन्य कर्मचारियों को शामिल कर संगठित तरीके से गबन कराया। बाकी छह आरोपी मुख्य रूप से गिनती और नकदीजेवर निकालने में सीधे शामिल बताए जा रहे हैं। मनीष यादव टिन्नू का रिश्तेदार है, जिसे उन्होंने ही गणना करने के लिए लगाया था। पुलिस की जांच में एसओपी का पालन न होना, हुंडियों की सुरक्षा में लापरवाही और बैंक जमा से पहले नकदी निकालना भी जांच के मुख्य बिंदु रहे। बताया जा रहा है कि अब पुलिस साक्ष्यों को अंतिम रूप दे रही है। आरोपियों की संपत्ति, बैंक खाते और मनी ट्रेल की जांच लगभग पूरी हो चुकी है।
90 दिन के भीतर अदालत में दाखिल करनी होगी चार्जशीट
नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187 के तहत अगर आरोपी जेल में हैं तो गंभीर अपराधों के लिए 90 दिन और सामान्य अपराधों के लिए 60 दिन की समय सीमा तय है। हालांकि कुछ विशेष कानूनों जैसे एनडीपीएस या देशद्रोह से जुड़े मामले के तहत जांच पूरी करने और चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा 180 दिन तक हो सकती है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले को गंभीर अपराध की श्रेणी में माना जा रहा है। इससे तय है कि पुलिस 90 दिन के अंदर आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर सकती है। ध्यान रहे कि मामले में 26 जून को केस दर्ज हुआ था, 90 दिन की अवधि 24 सितंबर तक पूरी होती है। ऐसे में माना जा रहा है कि पुलिस इस तिथि से पहले ही आरोप पत्र दाखिल कर सकती है। पुलिस इसके लिए तैयार भी है। मामले में आगे की कार्रवाई अदालत के आदेश पर निर्भर करेगी।