प्राइवेट पार्ट पर 50 टांके, 4 ऑपरेशन और वो खौफनाक दिन… जालंधर में दरिंदगी की शिकार हुई मासूम को कब मिलेगा इंसाफ? बोरी में पैक मिली थी बच्ची

प्राइवेट पार्ट पर 50 टांके, 4 ऑपरेशन और वो खौफनाक दिन… जालंधर में दरिंदगी की शिकार हुई मासूम को कब मिलेगा इंसाफ? बोरी में पैक मिली थी बच्ची

Punjab Crime News: जालंधर जिले से फरवरी 2022 में सामने आई एक दिल दहला देने वाली वारदात का घाव आज भी हरा है. पपीता देने का झांसा देकर एक मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाने, उसके साथ क्रूरतम बर्बरता करने और बोरी में भरकर श्मशान घाट के पास फेंकने के मामले में पीड़ित परिवार अब न्याय के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा है. निचली अदालत से अंतिम मुआवजा याचिका खारिज होने और आरोपी के लंबे समय से फरार रहने के बाद परिवार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

घटना 16 फरवरी 2022 की है. पीड़िता के अनुसार, गांव का ही राजेश नामक व्यक्ति उसे पपीता देने का बहाना बनाकर अपनी बाइक पर बैठाकर एक सुनसान जगह ले गया. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वहां उसने मासूम के साथ हैवानियत की हदें पार करते हुए दुष्कर्म किया.

इसके बाद आरोपी ने खून से लथपथ और गंभीर हालत में बच्ची को एक बोरी में पैक किया और गांव के श्मशान घाट के पास फेंककर फरार हो गया. खेतों में काम कर रहे नानानानी को जब एक राहगीर ने सूचना दी, तो वे मौके पर पहुंचे और बच्ची को तुरंत अस्पताल पहुंचाया.

मेडिकल जांच में क्रूरता का खुलासा: 50 टांके और 4 सर्जरियां

अस्पताल में जब बच्ची को लाया गया, तो उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी. डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि बच्ची पर “क्रूर भेदन हमला” किया गया था, जिससे उसके आंतरिक अंग बाहर आ गए थे. मासूम की जान बचाने के लिए डॉक्टरों के बोर्ड को बड़ी सर्जरी करनी पड़ी और उसके प्राइवेट पार्ट पर 50 से ज्यादा टांके लगाने पड़े. शारीरिक घाव तो भर गए, लेकिन बच्ची आज भी पपीते का नाम सुनते ही डर से कांप उठती है.

आरोपी भगोड़ा घोषित, न्याय की उम्मीद में हाईकोर्ट पहुंचा परिवार

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी राजेश तुरंत झारखंड भाग गया. 23 सितंबर 2022 को अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था. इससे पहले मार्च 2022 में पॉक्सो कोर्ट ने 1.75 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा मंजूर किया था, लेकिन 19 जनवरी 2024 को सेशन कोर्ट ने अंतिम मुआवजे की अर्जी यह कहकर खारिज कर दी कि आरोपी के गिरफ्तार या दोषी सिद्ध होने के बाद ही यह देय होगा.

आरोपी के पकड़े न जाने और अदालती कार्रवाई रुकने के बाद, पीड़िता की ओर से एडवोकेट सिमरन कौर अब इस मामले की पैरवी हाईकोर्ट में कर रही हैं, ताकि बच्ची को पूर्ण मुआवजा और न्याय मिल सके. बच्ची फिलहाल 7वीं कक्षा में अपनी पढ़ाई जारी रख रही है.

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