वॉशिंगटन: अमेरिका ने चीन के खिलाफ टैरिफ कार्रवाई को लेकर एक बड़ा आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस की नई रिपोर्ट में भारत समेत 40 से अधिक देशों को चीन के सामान को अमेरिकी टैरिफ से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले संभावित ‘ट्रांसशिपमेंट’ नेटवर्क से जोड़ा गया है। हालांकि, रिपोर्ट में इन सभी देशों पर जानबूझकर अवैध गतिविधि में शामिल होने का सीधा आरोप नहीं लगाया गया है।

अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान को तीसरे देशों के रास्ते अमेरिका भेजा जाता है और कुछ मामलों में उसकी उत्पत्ति यानी Country of Origin को बदलकर या गलत तरीके से दर्शाकर अमेरिकी टैरिफ से बचने की कोशिश की जाती है। इस प्रक्रिया को ट्रांसशिपमेंट कहा जाता है।
भारत समेत कई बड़े देश सूची में
रिपोर्ट में भारत के अलावा कनाडा, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, मलेशिया और यूरोपीय देशों समेत कई व्यापारिक साझेदारों को ऐसे जोखिम वाले देशों में शामिल किया गया है। अमेरिका का कहना है कि चीन की आपूर्ति श्रृंखला में इन देशों के जरिए सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है।
अमेरिका को अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस तरह के ट्रांसशिपमेंट के कारण अमेरिका को हर साल करीब 19 से 26 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट में चीन के सामान की तीसरे देशों के जरिए आवाजाही को बड़े पैमाने पर होने वाली गतिविधि बताया गया है।
AI से होगी निगरानी
अमेरिकी प्रशासन अब ऐसे मामलों पर नजर रखने के लिए AI आधारित ‘Detective Border’ सिस्टम विकसित कर रहा है। इसका उद्देश्य शिपमेंट, रूट, उत्पाद की जानकारी और अन्य व्यापारिक आंकड़ों में गड़बड़ियों की पहचान करना है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में कस्टम कार्रवाई और दंडात्मक कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
भारत को इस सूची में शामिल किए जाने से भारतअमेरिका व्यापार संबंधों और चल रही व्यापार वार्ताओं पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।