नोएडा के स्कूलों में अब मनमर्जी से नहीं चलेंगे स्मार्ट बोर्ड: तय हुआ ‘स्क्रीन टाइम’, हर 3 महीने में होगी छात्रों की आंखों की जांच

नोएडा के स्कूलों में अब मनमर्जी से नहीं चलेंगे स्मार्ट बोर्ड: तय हुआ ‘स्क्रीन टाइम’, हर 3 महीने में होगी छात्रों की आंखों की जांच

Noida News: डिजिटल शिक्षा के बढ़ते चलन के बीच बच्चों की आंखों पर पड़ रहे बुरे प्रभाव को ध्यान में रखते हुए गौतम बुद्ध नगर प्रशासन ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला लिया है. जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट स्कूलों के लिए नया आदेश जारी करते हुए डिजिटल व स्मार्ट बोर्ड का ‘स्क्रीन टाइम’ सीमित कर दिया गया है. प्रशासन के इस नए निर्देश के लागू होने के बाद अब कक्षा में लगातार स्मार्ट बोर्ड चलाने पर पाबंदी रहेगी और पारंपरिक ब्लैकबोर्ड का इस्तेमाल दोबारा अनिवार्य किया जाएगा.

प्रशासन द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन के अनुसार कक्षाओं को श्रेणीवार बांटकर स्क्रीन टाइम निर्धारित किया गया है. प्राइमरी स्तर के छोटे बच्चों के लिए रोजाना अधिकतम 30 मिनट ही स्मार्ट या डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल किया जा सकेगा. उच्च प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में रोज अधिकतम 60 मिनट डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल करने की अनुमति होगी. डिजिटल बोर्ड के इस्तेमाल के दौरान हर 20 मिनट के बाद बच्चों को आंखों को आराम देने के लिए स्क्रीन से ब्रेक देना जरूरी होगा.

पैरेंट्स एसोसिएशन की शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन

यह कदम पैरेंट्स एसोसिएशन की ओर से दर्ज कराई गई गंभीर शिकायतों के बाद उठाया गया है. अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि कई निजी और गैरसरकारी स्कूलों में किताबें दिखाने, साधारण क्लासवर्क कराने, सवालजवाब लिखने और यहां तक कि होमवर्क देने के लिए भी लगातार डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल हो रहा था. इसके चलते बच्चे रोजाना 4 से 5 घंटे लगातार स्क्रीन देखने को मजबूर थे, जिससे कम उम्र में ही उनकी आंखों की रोशनी प्रभावित हो रही थी और वे सिरदर्द व तनाव की समस्या से जूझ रहे थे. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश के सख्त पालन की निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है.

स्कूलों के लिए जारी की गई मुख्य गाइडलाइंस

सामान्य पढ़ाई, नोट्स बनाने और सवालजवाब लिखने के लिए अनिवार्य रूप से ब्लैकबोर्ड, वाइट बोर्ड या ग्रीन बोर्ड का ही इस्तेमाल किया जाएगा. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। स्मार्ट बोर्ड का उपयोग केवल कठिन कॉन्सेप्ट समझाने, शैक्षणिक वीडियो दिखाने या जरूरी डिजिटल शिक्षण सामग्री प्रदर्शित करने तक सीमित रहेगा. किताबों को लगातार स्क्रीन पर नहीं चलाया जाएगा. क्लासरूम की रोशनी, स्क्रीन की ब्राइटनेस और बच्चों के बैठने की स्क्रीन से दूरी के मानकों का सही पालन करना होगा.

हर तीन महीने में अनिवार्य रूप से बच्चों की आंखों की जांच कराई जाएगी और उसकी रिपोर्ट अभिभावकों के साथ साझा की जाएगी. सभी स्कूलों को अपने शेड्यूल में ‘डिजिटलफ्री पीरियड’, ‘डिजिटल जीरो डे’ और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ जैसी गतिविधियां शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.

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