4 घंटे झींगुर की आवाज सुनने से इस लड़के के कान हुए खराब…जंगल में नेचर म्यूजिक एन्जॉय करने गया था

4 घंटे झींगुर की आवाज सुनने से इस लड़के के कान हुए खराब…जंगल में नेचर म्यूजिक एन्जॉय करने गया था
4 घंटे झींगुर की आवाज सुनने से इस लड़के के कान हुए खराब...जंगल में नेचर म्यूजिक एन्जॉय करने गया था

चीन में 18 साल के एक लड़के को सिर्फ चार घंटे तक झींगुर की लगातार आवाज सुनना इतना भारी पड़ गया कि उसकी सुनने की क्षमता ही चली गई. शुक्र इस बात का था कि इलाज के बाद उसकी सुनने की क्षमता वापस लौट आई. लेकिन डॉक्टरों का कहना था कि हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता. कई मामलों में यह नुकसान हमेशा के लिए भी हो सकता है.

4 घंटे जंगल में रहा, सुनता रहा झींगुर की आवाज पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत के निंगबो शहर में रहने वाला 18 वर्षीय यांग जुलाई की शुरुआत में जंगल में कैंपिंग के लिए गया था. दोपहर के समय जंगल में झींगुर एक साथ आवाज कर रहे थे. यांग बिना किसी ईयर प्रोटेक्शन के करीब चार घंटे तक उसी माहौल में रहा. शाम होते-होते उसे कान बंद होने जैसा महसूस हुआ. कानों में सूजन आ गई और हालत यह हो गई कि उसे पक्षियों की चहचहाहट और मोबाइल की नोटिफिकेशन टोन जैसी तेज पिच वाली आवाजें भी सुनाई नहीं दे रही थीं.

झींगुर करीब 70 डेसिबल तक आवाज करता है जांच में पता चला कि यांग को तेज आवाज के कारण अस्थायी हियरिंग लॉस हुआ है. डॉक्टरों ने उसे शोर से दूर रहने और इलाज की सलाह दी. करीब 14 दिन बाद उसकी सुनने की क्षमता सामान्य हो गई. डॉक्टर बताते हैं कि लोगों को लगता है कि प्रकृति की आवाजें नुकसान नहीं पहुंचातीं, जबकि सच्चाई इससे अलग है.

उनके मुताबिक, एक झींगुर करीब 70 डेसिबल तक आवाज करता है, जो सामान्य तौर पर सुरक्षित मानी जाती है. लेकिन जब हजारों सिकाडे एक साथ आवाज करते हैं, तो शोर 85 डेसिबल से ज्यादा पहुंच सकता है. यही वह स्तर है, जहां से कानों को नुकसान शुरू हो सकता है.

कानों के अंदर की कोशिकाएं मर गईं तो फिर वापस नहीं आतीं तेज आवाज से कान के अंदर मौजूद कोक्लिया की बेहद नाजुक हेयर सेल्स में सूजन आ जाती है. अगर समय रहते आराम मिल जाए तो ये कोशिकाएं ठीक हो सकती हैं. लेकिन अगर ये नष्ट हो जाएं, तो दोबारा नहीं बनतीं. ऐसी स्थिति में सुनने की क्षमता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है और मरीज को हियरिंग एड का सहारा लेना पड़ सकता है.

अब हमेशा के लिए कम सुनाई देता है 60 वर्षीय माली लियू पिछले 12 साल से जून से अगस्त तक रोज पेड़ों की छंटाई करते रहे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इस दौरान वे घंटों झींगुर की तेज आवाज के बीच काम करते थे. धीरे-धीरे उन्हें कानों में लगातार सीटी बजने की शिकायत होने लगी. महिलाओं की आवाज और धीमी बातचीत सुनना भी मुश्किल हो गया. जांच में पता चला कि उन्हें स्थायी हियरिंग लॉस हो चुका है.

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