
नई दिल्ली। देश की अगली जनगणना अब सिर्फ आबादी की गिनती तक सीमित नहीं रहने वाली है। केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के दौरान लोगों से पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित कर दिया है। इनमें जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार और पलायन से लेकर मोबाइल नंबर, आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट और कोविड19 टीकाकरण से जुड़ी जानकारी शामिल है। खास बात यह है कि जनगणना के इतिहास में पहली बार जाति का विस्तृत ब्योरा दर्ज किया जाएगा।
सरकार के इस फैसले के साथ ही कांग्रेस ने जाति जनगणना की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जातियों की सूची उपलब्ध नहीं कराने और लोगों के बताए जवाब को उसी रूप में दर्ज करने की व्यवस्था से सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह पैदा होता है।
जाति पूछी जाएगी, लेकिन तैयार सूची नहीं होगी?
भारत के महापंजीयक मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश के मुताबिक जनगणना कर्मी लोगों से पूछेंगे कि वे अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं या नहीं और उनकी जाति क्या है। सूत्रों के मुताबिक प्रश्नावली में जातियों की कोई तैयार सूची दिए जाने की संभावना नहीं है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यानी उत्तरदाता अपनी जाति बताएगा और गणनाकर्मी उसके बताए जवाब को दर्ज करेंगे। जाति आधारित गणना को जनगणना में शामिल करने का फैसला 30 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने लिया था।
कांग्रेस बोली सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने जाति गणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उम्मीद थी कि बिहार और तेलंगाना में किए गए जाति सर्वेक्षणों की तरह राज्यवार जातियों की सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उत्तरदाता के जवाब के अनुसार संबंधित विकल्प पर निशान लगाया जाता। रमेश के मुताबिक ऐसा नहीं होने से जाति संबंधी आंकड़ों की प्रक्रिया और सरकार की मंशा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
जनगणना में आपके बारे में क्याक्या पूछा जाएगा?
जनगणना के 40 सवालों में लोगों की सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्थिति से जुड़ी कई जानकारियां शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- वैवाहिक स्थिति और विवाह के समय उम्र
- जीवनसाथी का नाम और राष्ट्रीयता
- धर्म और जाति
- एससी/एसटी की स्थिति
- मातापिता की जानकारी
- दिव्यांगता
- मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं
- साक्षरता और डिजिटल साक्षरता
- शिक्षा का उच्चतम स्तर और विषय
- रोजगार, पेशा और आर्थिक गतिविधि
- उद्योग, व्यापार या सेवा का प्रकार
- जन्मस्थान और पिछला निवास
- पलायन का कारण
- वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि
- स्थायी आवासीय पता
यानी इस बार जनगणना में केवल आबादी की संख्या ही नहीं, बल्कि लोगों की सामाजिकआर्थिक स्थिति से जुड़ा व्यापक डेटा भी जुटाया जाएगा।
आधार, मोबाइल और बैंक खातों की भी जानकारी
जनगणना के दौरान लोगों से डिजिटल पहचान और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। इसमें मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी और पासपोर्ट से संबंधित जानकारी शामिल है। लोगों से उनके बैंक खातों की कुल संख्या के बारे में भी पूछा जाएगा। इसके अलावा यह भी पूछा जाएगा कि उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं। कोविड19 टीकाकरण कहां कराया गया था, यह जानकारी भी प्रश्नावली में शामिल की गई है।
महिलाओं से बच्चों को लेकर होंगे खास सवाल
वर्तमान में विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से उनके जीवित बच्चों की संख्या के बारे में जानकारी ली जाएगी। उनसे मौजूदा विवाह से हुए बच्चों और पिछले एक साल में जीवित पैदा हुए बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।
डिजिटल होगी जनगणना, मिलेगा सेल्फएन्यूमरेशन का विकल्प
सरकार के मुताबिक जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने की तैयारी है। घरघर जाकर जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले लोगों को खुद अपनी जानकारी भरने यानी सेल्फएन्यूमरेशन का विकल्प भी दिया जाएगा। यह सुविधा 17 से 31 अगस्त तक उपलब्ध रहेगी।
बर्फीले इलाकों में 1 सितंबर से शुरू होगी गणना
लद्दाख और जम्मूकश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फ से ढके गैरसमकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 1 से 30 सितंबर तक होगी। देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना अगले साल शुरू की जाएगी। जनगणना के पहले चरण में घरों की सूची तैयार करने और मकानों की गिनती का काम शामिल है। कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गणना कर्मी 16 अप्रैल से घरघर जाकर घर की सुविधाओं, परिवार के मुखिया और मकान के मालिकाना हक जैसी जानकारियां जुटा रहे हैं।
कोरोना के कारण 2021 की जनगणना टली थी
हर दस साल में होने वाली जनगणना वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। अब केंद्र सरकार ने जनगणना कराने के लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस बार की जनगणना इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि पहली बार जाति का ब्योरा, शिक्षा, रोजगार, पलायन, डिजिटल साक्षरता और कोविड टीकाकरण जैसी जानकारियां एक साथ दर्ज की जाएंगी। वहीं, जातियों की सूची को लेकर कांग्रेस के सवालों ने जनगणना की प्रक्रिया को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।