
औरैया, अमृत विचार। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दहेज हत्या के एक मामले में निचली अदालत से दोषी ठहराए गए पति समेत तीन आरोपियों को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने तीनों की सजा को अपील के निस्तारण तक निलंबित करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। साथ ही पति को अर्थदंड की पूरी राशि जमा करने के दायित्व से भी अपील लंबित रहने तक राहत दी गई है।
सात साल से अधिक समय से जेल में था पति
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आपराधिक अपील संख्या 552/2026, जितेंद्र कुमार यादव उर्फ जीतू यादव व अन्य बनाम राज्य सरकार में सुनाया। मामला अछल्दा थाना क्षेत्र के अपराध संख्या 0430/2017 और सत्र परीक्षण संख्या 71/2019 से संबंधित है।
निचली अदालत ने आरोपियों को दहेज हत्या, दहेज उत्पीड़न और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा चार के तहत दोषी ठहराया था। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अपीलकर्ता संख्या एक करीब साढ़े सात वर्ष से जेल में बंद है। बचाव पक्ष ने मामले की परिस्थितियों को आत्महत्या से जुड़ा होने का तर्क भी अदालत के सामने रखा।
तीनों की सजा अपील तक निलंबित
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तीनों अपीलकर्ताओं की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया। इसके साथ ही उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया। भारतीय नौसेना में कॉर्पोरल पद पर तैनात रहे पति को अर्थदंड की पूरी राशि जमा करने से भी अपील के लंबित रहने तक विशेष राहत दी गई है।
दो दोषियों को जुर्माने की 50 फीसदी राशि जमा करनी होगी
अदालत ने अन्य दो अपीलकर्ताओं के लिए अलग निर्देश दिए हैं। उन्हें रिहाई के एक महीने के भीतर अर्थदंड की 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी। न्यायालय के इस आदेश से दोषियों के परिवार को बड़ी राहत मिली है।अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार त्रिपाठी ने अपील तैयार की, जबकि उच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष तिवारी ने पक्ष रखा।