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बहुत से लोगों के साथ यह समस्या होती है कि शाम होते होते पैरों में भारीपन महसूस होने लगता है। दरअसल, कई लोगों के दिन की शुरुआत में पैर सामान्य और हल्के महसूस होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे दिन ढलता है, पैरों में भारीपन, खिंचाव या हल्की सूजन महसूस होने लगती है। अक्सर लोग इसे थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह हमेशा थकान का संकेत नहीं होता। कई बार शरीर सूजन के जरिए यह बताने की कोशिश करता है कि रक्त संचार पर दबाव पड़ रहा है। चलिए जानते हैं ऐसा होना किन गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है।
हो सकती हैं ये समस्याएं:
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क्रोनिक वीनस इनसफिशिएंसी: क्रोनिक वीनस इनसफिशिएंसी एक ऐसी स्थिति है जब पैरों की नसें रक्त को हृदय तक वापस ले जाने में असमर्थ हो जाती हैं, जिससे नसों के वाल्व कमजोर होकर रक्त पैरों में जमा होने लगता है। इससे पैरों में भारीपन, दर्द, सूजन, और त्वचा में बदलाव हो सकते हैं। इसका मुख्य कारण वाल्व का खराब होना हो सकता है। लंबे समय तक खड़े रहने या बैठे रहने से यह समस्या और भी ज़्यादा बढ़ जाती है। यह समस्या ऑफ़िस में काम करने वालों, शिक्षकों, दुकानदारों और ऐसे किसी भी व्यक्ति में काफ़ी आम है, जिसे लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता है। इसे ठीक करने के लिए कम्प्रेशन स्टॉकिंग्स, पैर ऊपर उठाना और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं।
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कंजेस्टिव हार्ट फेलियर: कंजेस्टिव हार्ट फेलियर एक गंभीर स्थिति है जिसमें हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त रक्त पंप नहीं कर पाता है। इससे शरीर में तरल पदार्थ का जमाव, फेफड़ों, पैरों और अन्य अंगों में होता है। यह सांस फूलने, थकान और पैरों में सूजन का कारण बनता है। यह आमतौर पर उच्च रक्तचाप या कमजोर मांसपेशियों के कारण होता है। जब सूजन का संबंध दिल से जुड़ा होता है, तो इसका मतलब है कि शरीर को तुरंत डॉक्टरी मदद की ज़रूरत है।
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किडनी की बीमारी: किडनी शरीर के प्राकृतिक फ़िल्टर के तौर पर काम करते हैं। ये रक्त में मौजूद नमक, पानी और बेकार पदार्थों को छानकर शरीर से बाहर निकाल देते हैं। जब किडनी की कार्यक्षमता कम हो जाती है, तो टिशू में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। जिससे पैरों में लगातार सूजन की परेशानी हो सकती है।
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लिवर सिरोसिस: लिवर सिरोसिस एक गंभीर स्थिति है जिसमें लंबे समय तक नुकसान के कारण लिवर पर निशान पड़ जाते हैं और वह धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। इसके प्रमुख कारणों में अत्यधिक शराब का सेवन, हेपेटाइटिस और फैटी लिवर शामिल हैं। उपचार, जीवनशैली में बदलाव और शुरुआती पहचान से धीमा किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है



