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लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने से धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है। खासकर, पेट के आसपास तेजी से चर्बी बढ़ती है. दरअसल, डेस्क जॉब करने वाले लोग कम शारीरिक गतिविधि की वजह से अक्सर मोटापे से परेशान रहते हैं। ऐसे में अगर आप रोजाना कुछ आसान एक्सरसाइज़ को अपनी रूटीन में शामिल करें, तो पेट की चर्बी कम करने और शरीर को फिट रखने में काफी मदद मिल सकती है।
लंबे समय तक बैठे रहने से क्या होता है?
लंबे समय तक बैठे रहने से तोंद निकलना, मोटापा बढ़ना, कंधों का आगे झुकना, हिप फ्लेक्सर्स का कड़ा होना और ग्लूट्स कमजोर होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे शरीर के निचले हिस्से में दर्द और समय के साथ पोस्चर खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
डेस्क जॉब वाले करें ये एक्सरसाइज़:
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डायनामिक काउच स्ट्रेच: डायनामिक काउच स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ कूल्हों को खोलती है, जिससे उस हिस्से और पीठ के निचले हिस्से में आई अकड़न दूर होती है। इसमें घुटने को दीवार की ओर रखकर, आगे के पैर के सहारे शरीर को आगे-पीछे हिलाते हुए स्ट्रेच किया जाता है।
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डेड हैंग्स: डेड हैंग्स पुल-अप बार से लटककर की जाने वाली एक कसरत है, जो शरीर के पोस्चर को सुधारती है। यह पीठ की मांसपेशियों, बाहों और सीने को स्ट्रेच कर,रीढ़ की हड्डी पर से दबाव कम करती है। यह डेस्क जॉब वाले लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है। शुरुआत में 30 सेकंड का लक्ष्य रखें और धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं।
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हिप थ्रस्ट्स: हिप थ्रस्ट्स ग्लूट्स (कूल्हे की मांसपेशियों) को मजबूत करने वाली एक एक्सरसाइज है, जो लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने वालों के लिए बहुत फायदेमंद है। यह कूल्हे की मांसपेशियों को सक्रिय कर पोस्चर सुधारने, कमर दर्द कम करने और शरीर की स्थिरता बढ़ाने में मदद करती है। आप इसे बिना वजन या डम्बल/बारबेल के साथ, हफ्ते में 2-3 बार कर सकते हैं।
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द मैकगिल बिग: द मैकगिल बिग में बर्ड डॉग, साइड प्लैंक और मैकगिल क्रंच शामिल हैं। ये व्यायाम बिना रीढ़ की हड्डी पर दबाव डाले, कोर की मांसपेशियों को मजबूती देते हैं। ये एक्सरसाइज पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करने, रीढ़ को स्थिर करने और पोस्चर को सुधारने में बेहद प्रभावी हैं।
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वॉकिंग: रोजाना 20-30 मिनट की तेज चाल मांसपेशियों को मजबूत करने, ब्लड सर्कुलेशन सुधारने और रीढ़ की हड्डी को गतिशील बनाए रखने में मदद करती है। यह पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और कोर की मांसपेशियों को सक्रिय करती है, जिससे अकड़न और पीठ दर्द कम होता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है



