बैंक से जुड़े काम अब होंगे और आसान… सरकार बनाने जा रही है नई कमिटी, बदल जाएंगे बैंकिंग के नियम!

बैंक से जुड़े काम अब होंगे और आसान… सरकार बनाने जा रही है नई कमिटी, बदल जाएंगे बैंकिंग के नियम!

देश के बैंकिंग सेक्टर को पूरी तरह से आधुनिक, तेज और ग्राहकों के अनुकूल बनाने के लिए सरकार जल्द ही एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन करने जा रही है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्फ्लुएंस 2026’ के पहले दिन यह अहम जानकारी साझा की. इस कदम का सीधा मकसद साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करना है, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले बैंक सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे. वित्त मंत्री ने साफ किया कि बैंकों का फंसा हुआ कर्ज इस समय ऐतिहासिक रूप से अपने सबसे निचले स्तर पर है. इसका मतलब है कि देश के बैंक अब आर्थिक रूप से काफी मजबूत हैं और अगले चरण के बड़े सुधारों को आसानी से लागू कर सकते हैं.

युवाओं की जरूरतों के हिसाब से तैयार होंगे बैंक

देश की कुल आबादी में करीब 29 प्रतिशत हिस्सा 15 से 29 साल के युवाओं का है. इसी को ध्यान में रखते हुए बैंकिंग सेक्टर अब खुद को नई पीढ़ी की आकांक्षाओं के अनुरूप ढालने की तैयारी कर रहा है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन इस बात पर गहरा मंथन हुआ कि कैसे युवाओं को फॉर्मल बैंकिंग सिस्टम से ज्यादा से ज्यादा जोड़ा जाए. इसके लिए सरकार युवा मामलों के मंत्रालय के राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म ‘मेरा युवा भारत’ का सहारा लेगी. इस प्लेटफॉर्म पर पहले से ही 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा युवा जुड़े हुए हैं. अब इस विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल युवाओं को एजुकेशन लोन, इंटर्नशिप, स्वरोजगार के लिए फाइनेंस और वित्तीय सेक्टर में करियर बनाने के मौकों के प्रति जागरूक करने के लिए किया जाएगा.

ग्राहकों की जमा राशि बढ़ाने पर खास जोर

बैंकिंग सुधारों का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर आम आदमी की बचत से जुड़ा है. सम्मेलन में इस बात पर विस्तृत चर्चा की गई कि ग्राहकों के साथ बैंकों का जुड़ाव कैसे और मजबूत किया जाए, ताकि लोग बैंकों में अपनी जमा राशि बढ़ा सकें. इसके साथ ही देश में निवेश के चक्र को रफ्तार देने और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के तेजी से बढ़ते बाजार का फायदा उठाने के लिए सरकारी बैंकों की क्षमता बढ़ाने की रणनीति भी बनी. वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव संजय लोहिया ने स्पष्ट किया कि इन चर्चाओं को सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इन्हें जमीन पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. बैंक एकदूसरे के सफल अनुभवों से सीखकर देश के आर्थिक विकास को नई गति देंगे.

क्रेडिट कार्ड बिजनेस का बदलेगा पूरा स्वरूप

इस दो दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फैसला होना है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. बैंकिंग सेक्टर अब क्रेडिट कार्ड के बिजनेस को पूरी तरह से नए सिरे से परिभाषित करने की योजना बना रहा है. इसके साथ ही कृषि, बागवानी से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कर्ज देने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर विचार किया जाएगा. प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को समय पर और बिना रुकावट पैसा मिले, इस पर भी एक स्पष्ट खाका तैयार होगा.

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